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Jhansi News: हृदय की जन्मजात विकृति से ग्रसित नवजात केजीएमयू रेफर

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में 15 नवंबर को हुए अग्निकांड के बाद हृदय की जन्मजात विकृति टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट से ग्रसित एक नवजात को केजीएमयू, लखनऊ रेफर कर दिया गया है। इस विकृति के चलते नवजात के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम बना हुआ है। वहीं, एक अन्य नवजात वेंटिलेटर पर है।
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मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू में बनाए गए नए एसएनसीयू में रविवार को दो नवजात भर्ती थे। दोनों की स्थिति ही गंभीर बनी हुई थी। इनमें महोबा निवासी महिला का शिशु टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट से पीड़ित है, जो की गंभीर स्थिति है। सीएमएस डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि दवाओं से इस जन्मजात विकृति का उपचार संभव नहीं है। इसलिए केजीएमयू रेफर कर दिया गया है। एक शिशु वेंटिलेटर पर है। इस जन्मजात विकृति के बारे में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद गुप्ता ने बताया कि टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट तब होता है, जब गर्भ में बच्चे का दिल सही तरीके से नहीं बनता। इससे पीड़ित शिशु के दिल में छेद, बड़ी धमनी का सही स्थान पर न होना, वाॅल्व सिकुड़ जाने के अलावा दाहिना निलय का आकार बढ़ जाता है। दिल में छेद होने से अशुद्ध और शुद्ध रक्त आपस में मिल जाते हैं। ऐसे में शरीर में कम ऑक्सीजन वाला रक्त प्रवाहित होता रहता है। बड़ी धमनी के सही स्थान पर न होने से भी ऑक्सीजन और बिना ऑक्सीजन वाला रक्त आपस में मिल जाता है। ऑक्सीजन का स्तर कम होने से रोने पर बच्चे का शरीर नीला पड़ जाता है। दाहिने निलय का आकार बढ़ जाने से हृदय की पंपिंग क्षमता कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि भारत में जन्म लेने वाले हर एक हजार नवजातों में दो से चार शिशु इस विकृति से ग्रसित हो सकते हैं। हालांकि, सर्जरी के बाद अधिकतर नवजात ठीक हो जाते हैं। छह महीने से एक साल की आयु में सर्जरी हो जाती है।
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ये हैं लक्षण



बार-बार चेस्ट संक्रमण होना

शारीरिक विकास प्रभावित हो जाना

रोने पर ही बच्चे का शरीर नीला पड़ना
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