भोजला में नई मंडी बनकर तैयार हो गई है। इसी माह यह मंडी समिति के सुपुर्द करने की तैयारी है। इसके बाद मंडी की दुकानों का आवंटन होगा। हालांकि, अभी इसका मसौदा तैयार नहीं किया गया है। दूसरी तरफ, बुंदेलखंड पैकेज के तहत बनाई गई 133 छोटी मंडियों में सन्नाटा पसरा है। दुकानें तो आवंटित कर दी गईं, लेकिन वहां जाने को कोई तैयार नहीं है। इसका कारण दूरी और वहां पर्याप्त सुविधाएं न होना है।
बुंदेलखंड पैकेज के तहत बुंदेलखंड के प्रत्येक जनपद को एक-एक विशिष्ट मंडी स्थल (बड़ी मंडी) आवंटित किया गया था। इसके लिए इक्यावन करोड़ अस्सी लाख रुपये की धनराशि जारी की गई थी। झांसी में उन्नाव बालाजी रोड पर भोजला में इसका निर्माण 31 अक्तूबर 2014 में शुरू किया गया था। अप्रैल 2017 में काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। समय से पहले इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। मंडी बनकर तैयार है। कागजी औपचारिकताओं के बाद इसी माह इसे मंडी समिति के सुपुर्द कर दिया जाएगा। इसके बाद मंडी में दुकानों का आवंटन होगा। राज्य मंडी परिषद के उप निदेशक (प्रशासन) भगवान शरण ने बताया कि मंडी सुपुर्दगी में आने के बाद दुकानों के आवंटन का मसौदा तैयार किया जाएगा। इसमें व्यापारी और किसानों दोनों का ही हित ध्यान में रखा जाएगा।
एक नजर में नई मंडी
- 100 एकड़ क्षेत्रफल
- 34 एकड़ में निर्माण
- ए, बी और सी श्रेणी की 124 दुकानें
- पांच-पांच हजार मीट्रिक टन के दो गोदाम
- छह सार्वजनिक शौचालय
- बैंक, पोस्ट ऑफिस, किसान डोरमेट्री, चिकित्सालय और कार्यालय
छोटी मंडियों का है बुरा हाल
बुंदेलखंड पैकेज के तहत उत्तर प्रदेश के हिस्से में आने वाले बुंदेलखंड के सातों जनपदों में 133 छोटी मंडियों का निर्माण किया गया था। इसमें से झांसी जिले में 24 मंडियां बनाई गईं थीं। ये मंडियां चार साल पहले बनकर तैयार हो गईं थीं और इनका आवंटन भी किया जा चुका हैं। लेकिन, यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। निर्माण पर बुंदेलखंड पैकेज के तहत खर्च की गई करोड़ों रुपये की धनराशि पानी में चली गई है। मंडी आढ़ती हरभजन साहू का कहना है कि छोटी मंडियां गांवों से दूर निर्जन इलाकों में बनाई गईं हैं। इनमें व्यापार की बिलकुल संभावनाएं नहीं हैं। किसान आने से कतराते हैं, जिससे आवंटी कारोबार शुरू नहीं कर रहे हैं।