झांसी। मेडिकल कॉलेज के पास संचालित दो पंजीकृत नर्सिंग होम में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के छापे में गंभीर खामियां सामने आईं। दोनों अस्पतालों में मरीज भर्ती मिले, लेकिन मौके पर न डॉक्टर मौजूद थे और न ही नर्सिंग स्टाफ। कई जरूरी व्यवस्थाएं भी नदारद मिलीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मानकों के अभाव के बावजूद इन अस्पतालों का पंजीकरण कैसे हुआ।
सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी के निर्देश पर डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष अग्निहोत्री ने शाम करीब 4 बजे मेडिकल कॉलेज गेट नंबर-दो के सामने करगुवांजी रोड स्थित 25 बेड के लिए पंजीकृत परिवार मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल पर छापे मारे। जांच के दाैरान यहां न डॉक्टर मिले और न ही पैरामेडिकल स्टाफ। अस्पताल में आईसीयू वार्ड भी नहीं मिला। मेडिकल स्टोर में भी अव्यवस्थाएं पाई गईं।
इसके बाद टीम ने 10 बेड के लिए पंजीकृत श्री राधा रानी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की जांच की। यहां भी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ अनुपस्थित मिले। ऑक्सीजन सिलेंडर खुले में रखे थे। प्राइवेट कमरों में जमीन पर गद्दे बिछे मिले। स्टरलाइजेशन की व्यवस्था नहीं थी और पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड भी नहीं मिला।
डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष अग्निहोत्री ने बताया कि दोनों अस्पतालों की जांच रिपोर्ट सीएमओ को भेजी जाएगी। संबंधित संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। जवाब संतोषजनक न मिलने पर पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
पंजीकरण के बाद निरीक्षण व्यवस्था पर भी उठे सवाल
दोनों अस्पताल पंजीकृत हैं, लेकिन छापे में बुनियादी मानकों तक का अभाव मिला। इससे स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि अस्पतालों में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड और स्टरलाइजेशन जैसी अनिवार्य सुविधाएं नहीं थीं तो पंजीकरण के समय और उसके बाद हुए निरीक्षणों में यह स्थिति सामने क्यों नहीं आई? कार्रवाई के बाद विभाग में इसको लेकर चर्चाओं का दौर रहा।
-
शहर में 200 से अधिक नर्सिंग होम, पंजीकृत सिर्फ 130
शहर में बड़ी संख्या में नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथोलॉजी सेंटर संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में पूरे जिले में केवल 130 नर्सिंग होम पंजीकृत हैं, जबकि शहर में ही इनकी संख्या 200 से अधिक बताई जाती है। ऐसे में अपंजीकृत संस्थानों के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के आसपास भी कई अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं, जिनकी नियमित जांच और सत्यापन की जरूरत महसूस की जा रही है।
डीएम ने सात टीमें गठित कीं, लेकिन ठंडी पड़ी जांच
जिलाधिकारी गौरांग राठी ने शिकायतें मिलने पर 12 मई को जिले के नर्सिंग होमों की जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने अपंजीकृत और मानकविहीन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश देते हुए क्षेत्रवार सात टीमों का गठन भी किया था। हालांकि, एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी जांच अभियान अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। सोमवार को दो नर्सिंग होमों पर हुई कार्रवाई के बाद जांच व्यवस्था और उसकी प्रभावशीलता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ऐसे होता है नर्सिंग होम का पंजीकरण
नर्सिंग होम संचालक को सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर आवेदन करना होता है। आवेदन में कार्यरत डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और उपलब्ध सुविधाओं का विवरण देना पड़ता है। इसके बाद क्लीनिकल रजिस्ट्रेशन अधिकारी मौके पर निरीक्षण कर सुविधाओं, स्टाफ और दस्तावेजों का सत्यापन करता है। सभी मानक पूरे मिलने पर पंजीकरण जारी किया जाता है। पंजीकरण के बाद भी समय-समय पर संस्थान का निरीक्षण और मानकों की समीक्षा की जानी होती है।