झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कोविड ड्यूटी से डॉक्टर को हटाने का पहला मामला सामने आया है। इसके कारण डॉक्टर द्वारा संक्रमित मरीजों का सही से इलाज न करना पाया गया। यह स्थिति तब है, जब कंसल्टेंटों को पिछले पांच महीने से लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में शिफ्ट के हिसाब से डॉक्टरों की ड्यूटी लगती है। सर्जरी विभाग के एक डॉक्टर कंसल्टेंट के तौर पर कोविड वार्ड में तैनात किया गया था। कुछ समय कार्य करने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने डॉक्टर को ड्यूटी से हटाने के आदेश जारी कर दिए। पत्र में लिखा गया कि कोविड वार्ड में ड्यूटी पर तैनात किए गए सर्जरी विभाग के डॉक्टर के स्थान पर किसी कुशल प्रशिक्षित कंसल्टेंट को तत्काल कोविड वार्ड में तैनात किया जाए। डॉक्टर को कार्यमुक्त कर दो दिन के लिए होम आइसोलेशन या आरटीपीसीआर जांच कराकर रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद कोरोना मैनेजमेंट, इंफेक्शन प्रिवेंशन कंट्रोल एवं वेंटिलेटर की ट्रेनिंग एक सप्ताह के अंदर कराना सुनिश्चित किया जाए। ताकि, अगली पाली के बाद इनकी तैनाती की जा सके। पत्र निकलने के ठीक अगले दिन उनके स्थान पर अस्थि रोग विभाग के डॉक्टर की ड्यूटी कोविड वार्ड में लगा दी गई। वहीं, डॉक्टरों के बीच इस बात की चर्चा रही कि क्या हटाए गए डॉक्टर ने पांच महीने से सभी कंसल्टेंट को दिया जाने वाला एक भी प्रशिक्षण नहीं लिया? क्या यह कोरोना ड्यूटी से हटने का बहाना है या वास्तविकता?