झांसी। जिले में कोरोना योद्धा के तौर पर ड्यूटी कर चुकीं स्टाफ नर्सों को एक साल से मानदेय नहीं मिला है। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बेहद गड़बड़ा गई है। वहीं, अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई गई लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सेवा प्रदाता एजेंसी के जरिए सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वर्ष 2018 में 17 स्टाफ नर्सों को नौकरी पर रखा गया था। शुरूआती समय में तो सब ठीक रहा लेकिन बाद में कर्मचारियों को मानदेय मिलने में समस्या शुरू हो गई। अमर उजाला ने पहले भी कर्मचारियों को मानदेय न मिलने की समस्याओं को उठाया था तो वर्ष 2019 के अप्रैल, मई और जून महीने का मानदेय जारी हो गया था। इसके बाद से उन्हें कोई मानदेय नहीं मिला है। स्टाफ नर्स ने बताया कि एक साल से अधिक समय से उनको मानदेय नहीं मिलने के कारण दो वक्त की रोटी खाना तक मुश्किल हो गया है। रोजाना ड्यूटी पर आने के लिए उन्हें घर से किराया लगाना पड़ रहा है। कोरोना वायरस के दौर में वह कोविड की ड्यूटी तक कर चुके हैं। इसके बावजूद उनका मानदेय जारी नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि अगस्त में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सीएचसी, पीएचसी का निरीक्षण करने आए तब भी समस्या के बारे में बताया गया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, इस मामले में एडी हेल्थ डॉ. वीके सिन्हा ने बताया कि उनके संज्ञान में यह प्रकरण नहीं है। इसको पता कराकर कर्मचारियों को मानदेय भुगतान कराया जाएगा।