Negligence : devlopment work stopped
झांसी। नगर निगम की ओर से महानगर में होने वाले निर्माण कार्यों की रफ्तार अफसरों की लापरवाही ने रोक दी। महानगर में सालों से लंबित पड़े काम अधिकारियों स्वीकृति के अभाव में काम अटके रहे। आलम यह है कि निर्माण कार्यों की धीमी चाल ने महानगर का बेड़ा गर्क कर दिया है। वहीं पार्षदों में इसे लेकर रोष है।
नगर निगम की ओर से जारी किए गए विवरण के मुताबिक महानगर में बीते तीन सालों में करीब 31 करोड़ रुपये के निर्माण और मरम्मत कार्यों के एस्टीमेट तैयार किए गए। जिसमें से करीब 20.56 करोड़ रुपये के कामों की निविदा कराई गई। इसमें से अब तक महज आठ करोड़ रुपये के काम पूरे हो सके हैं। स्थिति यह हो गई है कि निर्माण कार्यों के लिए लगातार पार्षद और जनता आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अफसरोें की मनमानी के चलते निर्माण कार्य अटके हुए हैं। बताया जाता है कि 478 कामों में से महज 322 काम पूरे हो सके हैं। जबकि 53 काम शुरू ही नहीं हुए हैं। इसके साथ ही 37 निर्माण कार्य ऐसे हैं, जो पुन: निविदा और स्वीकृति के चलते लटके हुए हैं। अगर ये निर्माण कार्य शुरू हो गए होते, तो महानगर की तस्वीर कुछ और होती। पार्षद विकास खत्री कहते हैं कि निर्माण कार्यों की लगातार पुन: निविदा होती है, तो कभी पूल टेंडरिंग के चलते टेंडर निरस्त कर दिए जाते हैं। इसके चलते महानगर का विकास रुका हुआ है। वहीं पार्षद प्रदीप नगरिया का कहना है कि निर्माण के कामों के प्रस्ताव तो बनाए जाते हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं हो पाता। निगम अधिकारी जनता के साथ धोखा कर रहे हैं। यह गलत है। पार्षद बंटी सोनी का कहना है कि निर्माण कार्यों की रफ्तार तेज किए जाने चाहिए। ताकि जनता को राहत मिल सके।
----------
इनका कहना है
निर्माण और मरम्मत कार्यों का संक्षिप्त विवरण जारी किया गया है। जिसमें तमाम कार्य हो चुके हैं। जबकि कुछ कामों की पुन: निविदा हुई थी, उनमें से अधिकतर 22 मई को खोली जा चुकी है। इसके साथ ही निर्माण कार्य लॉकडाउन के चलते रुक गए थे। जिन्हें जल्द दोबारा शुरू कराया जाएगा।
एलएन सिंह, मुख्य अभियंता, नगर निगम