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एनबीए की कवायद शुरू, लक्ष्य काफी दूर

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन (एनबीए) की कवायद शुरू करने का दावा किया जा रहा है। इसके तहत सोमवार को बीयू में हुई ऑनलाइन विद्या परिषद की बैठक में बीटेक के चार विभागों में एक-एक प्रोफेसर और दो-दो एसोसिएट प्रोफेसर के पदों का सृजन कर दिया गया। हालांकि, सिर्फ इसी से काम नहीं चलने वाला है। विभाग में काफी कुछ दुरुस्त करने की जरूरत है।
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बीयू के इंजीनियरिंग विभाग में सात ब्रांचें हैं। इसमें कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स कम्यूनिकेशन, बायोटेक्नोलॉजी और मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में एक-एक प्रोफेसर और दो एसोसिएट प्रोफेसर का पद सृजन किया जाएगा। सोमवार को ऑनलाइन हुई विद्या परिषद की बैठक में इस पर मुहर लगी। हालांकि, इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इससे बीयू एनबीए सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर सकेगा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इसके अलावा भी तमाम कवायद करने की जरूरत पड़ेगी। एनबीए प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने को कम से कम दो साल से एक प्रोफेसर अथवा एक एसोसिएट प्रोफेसर होना अनिवार्य है। तभी आवेदन किया जा सकता है, जो कि इंजीनियरिंग की किसी भी ब्रांच में नहीं है।
ये मानक होने जरूरी
- सबसे पहले ये सुनिश्चित होना चाहिए कि विभाग का हेड पीएचडी हो।
- कम से कम दो साल से विभाग में एसोसिएट या प्रोफेसर नियुक्त हो।
- कम से कम 15 फीसदी पीएचडी विभाग में होने चाहिए।
- लेबोरेट्री की स्थिति बेहतर होनी चाहिए।
- स्नातक स्तर के सभी उपकरण व उनको चलाने के लिए तकनीकी व्यक्ति जरूरी।
सोमवार को हुई विद्या परिषद की बैठक में इंजीनियरिंग विभाग में एक-एक प्रोफेसर और दो-दो एसोसिएट प्रोफेसर के पदों का सृजन कर दिया गया है। काफी समय से इसकी मांग की जा रही थी। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बीयू।
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