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कारखाने में स्क्रैप से तैयार हो गए राष्ट्रीय स्मारक, खाली जमीन में बन गए पार्क

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झांसी। रेलवे वैगन मरम्मत कारखाना पिछले चार साल में एक अलग रूप में नजर आने लगा है। कर्मचारियों ने खराब पड़े लोहे (स्क्रैप) से कई राष्ट्रीय स्मारक बनाने के अलावा हेरिटेज धरोहर को नया रूप देकर बेहद सुंदर बना दिया है। कई जगह सुंदर पार्क और भूमिगत जलस्तर सुधारने के लिए तीन तालाबों का निर्माण कराया गया। इतना ही नहीं सालों से जमीन में दबे स्क्रैप को निकालकर उससे 3.50 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया।
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भारतीय रेल के लिए सर्वाधिक वैगनों का उत्पादन करने वाला झांसी वैगन मरम्मत कारखाना 25 नवंबर को अपने स्थापना के 125 साल पूरे कर रहा है। एशिया महाद्वीप का यह सबसे बड़ा कारखाना है। इस कारखाने को बुंदेलखंड के पहले औद्योगिक इकाई के रूप में जाना जाता है। वर्तमान में कारखाने में साढ़े चार हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारी वैगन मरम्मत के अलावा कारखाने को सुंदर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। अभी तक कंडम आइटम और मेटेरियल से इंडिया गेट, गेट वे ऑफ इंडिया, शहीद स्तंभ, सरदार वल्लभ भाई पटेल व महात्मा गांधी का कट मॉडल, कुटिया का निर्माण कर चुके हैं। कर्मचारी अब स्क्रैप से ताजमहल का निर्माण कर रहे हैं। हेरिटेज धरोहर नैरो गेज कोच, नैरो गेज वैगन, रेल बस, स्टीम रोड रोलर, डीजल रोड रोलर व आरए कोच की मरम्मत कर उनको भागीरथ पार्क में रखा गया है। कारखाने के मुख्य द्वार फैमिली ट्री का निर्माण किया गया है, जिसमें कर्मचारियों की फोटो लगाई गई है। ताकि कर्मचारी को कारखाने में उनकी भागीदारी का अहसास हो। पर्यावरण को ध्यान में रखकर कुछ कर्मचारियों ने अपने मासिक वेतन से अंशदान देकर पॉकेट यार्ड में बेकार पड़ी सात आठ हेक्टेयर भूमि में दो हजार से अधिक पौधे रोपित किए हैं।
- कारखाने में कर्मचारियों के सहयोग से लगातार बेहतरी के लिए काम चल रहा है। कर्मचारियों को अपना हुनर दिखाने का मौका मिल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के लिए कार्य के दौरान अच्छा माहौल बनाना है।
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आरडी मौर्या, मुख्य कारखाना प्रबंधक
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