झांसी। राजस्व महकमे की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले नायब तहसीलदारों की जिले में भारी कमी बनी हुई है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि राजस्व निरीक्षकों के 19 में से 14 पद खाली चल रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा आम जनमानस को भुगतान पड़ रहा है। लोगों के राजस्व संबंधी काम समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
जिले में नायब तहसीलदारों के 19 पद हैं। इनमें से सदर तहसील, मोंठ, मऊरानीपुर व गरौठा तहसील में नायब के तीन-तीन तथा टहरौली तहसील में दो पद हैं। जबकि, नायब तहसीलदार का एक पद सीलिंग, एक विशेष भूमि व दो सेल टैक्स में हैं। लेकिन, तैनाती सिर्फ पांचों तहसीलों में एक-एक नायब तहसीलदार की ही है। नायब तहसीलदारों के पद रिक्त होने का सबसे ज्यादा खामियाजा आम जनमानस को भुगतना पड़ रहा है। तहसीलों में आने वाली राजस्व संबंधी छोटी-बड़ी शिकायतों का निस्तारण तहसीलदार या नायब तहसीलदार के जरिये ही होता है। लेकिन, पद रिक्त होने की वजह से पूरा बोझ तहसीलदार व बचे हुए नायब तहसीलदारों पर आ गया है। काम का बोझ बढ़ा होने की वजह से समय पर निस्तारण नहीं हो पा रहा है। परेशान लोगों को होना पड़ रहा है। इसके अलावा संपत्ति के दाखिल-खारिज के काम भी बुरी तरह से प्रभावित बने हुए हैं।
राजस्व निरीक्षक के 52 में से 36 पद खाली
झांसी। जिले में राजस्व निरीक्षकों की भी भारी कमी चल रही है। 52 में से 36 पद खाली हैं। 16 राजस्व निरीक्षकों के भरोसे ही राजस्व अमला चल रहा है। सदर तहसील में 10 में से 7, मोंठ में 14 से 10, मऊरानीपुर में 10 में से 7, गरौठा में 10 में से 7 तथा टहरौली तहसील में राजस्व निरीक्षक के 7 में से 4 पद खाली बने हुए हैं। इससे हदबंदी का काम सबसे ज्यादा प्रभावित बना हुआ है।