झांसी। कोरोना संक्रमण के दौर में विकास कार्यों की उम्मीद करना ही बेमानी है। सरकार ने नगर निकायों को बजट देने में कंजूसी कर रही है। अब शासन ने निकायों से अम्रुत योजना के तहत दिए गए बजट का निकाय अंश मांग लिया है। नगर निगम को इस मद में करीब 36 करोड़ रुपये अदा करने हैं। ऐसे में निगम एक बार फिर से विकास कार्यों को टालने की तैयारी कर रहा है। इसके चलते जनता की परेशानी बढ़ेगी।
कोरोना संक्रमण के दौरान सरकार की ओर से लगातार विभिन्न मदों के बजट में कटौती की जा रही है। आलम यह है कि शासन ने 14वें वित्त की धनराशि से वेतन देने के लिए कहा है। संकट के दौर से गुजर रहे निकायों से शासन ने अब निकायों का अंश मांग लिया है। अम्रुत योजना के तहत पेयजल योजना, पार्क समेत अन्य कार्यों के लिए दिए गए बजट के सापेक्ष निकाय अंश जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम को अब तक एक अरब 79 करोड़ रुपये मिले हैं। जिसके सापेक्ष करीब निकाय अंश करीब 36 करोड़ रुपये है। शासन ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर जल्द से जल्द निकाय अंश जमा कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में नगर निगम अधिकारियों की मुसीबत बढ़ी हुई है। नगर निगम इस राशि का भुगतान 14वें वित्त से करने की तैयारी कर रहा है। जबकि 14वें वित्त में भी करीब 75 करोड़ रुपये हैं। इसी वित्त से कुछ विकास कार्यों के टेंडर हो भी गए हैं और कुछ होने हैं। ऐसे में निगम 14वें वित्त के तहत शुरू होने वाले निर्माण कार्यों को रोकेगा। शासन के आदेश के बाद निकायों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं।
तमाम निकाय खाली हाथ
प्रदेश के 60 निकायों से करीब आठ अरब रुपये निकाय अंश के तौर पर जमा कराए जाने हैं। लेकिन प्रदेश के तमाम निकाय ऐसे हैं, जिनके पास कोई बजट ही नहीं बचा है। हालात यह हो गए हैं कि निकाय वेतन तक नहीं दे पा रहे हैं।
अम्रुत योजना के निकाय अंश को जमा करने के लिए विचार किया जा रहा है। 14वें वित्त में भी पैसा कम बचा है। कुछ विकास कार्यों को भविष्य के लिए टालना पड़ सकता है, लेकिन शासन के निर्देश का पालन करेंगे।
राजकिशोर, लेखाधिकारी नगर निगम