नगर निगम सीमा में महानगर से सटे आसपास के बाइस गांव शामिल किए जाने की तैयारी है। इससे इन गांवों के निवासियों में शहरी विकास की उम्मीदें जग गईं हैं। हालांकि, योजना को साकार रूप लेने में अभी समय लगेगा, परंतु ग्रामीण आशान्वित हैं। अंबाबाय गांव के बाशिंदों ने वहां की हालात बयां किए। उम्मीद जताई कि समस्याओं से निजात मिलेगी।
शहर से महज पंद्रह किलोमीटर दूर ग्वालियर रोड पर ही अंबाबाय गांव है। शहरी सीमा से सटा होने के बावजूद यह गांव पीने के पानी, सफाई, बिजली जैसी बुनियादी सहूलियतों से भी वंचित है। अंबाबाय से जुड़े इन गांवों में पीने के पानी का कोई ठोस इंतजाम नहीं है। करीब बारह हजार आबादी के गांव के पीने के लिए सिर्फ अंबाबाय में ही टंकी लगी है।
आसपास के गांवों में भी इसी से जलापूर्ति होती है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आधे घंटे ही जलापूर्ति होती है। शाम को पानी नहीं आता। चौक, रेलवे क्रासिंग के आसपास इलाके में पाइपलाइन चोक होने से पानी यहां आता ही नहीं। लोगों को खरीदकर पानी पीना पड़ता है। गांव के लोगों को उम्मीद है कि नगर निगम सीमा में शामिल होने पर पानी की समस्या से कम से कम छुटकारा मिल सकेगा।
पानी की बहुत परेशानी है। पीने का पानी नहीं मिलता। जो पानी आता है वह साफ नहीं होता। शहर में शामिल होने पर सबसे पहले पानी की समस्या ही दूर होनी चाहिए।
भगवती, अंबाबाय
इन सभी गांवों में पीने के पानी की बहुत बड़ी समस्या है। इतनी बड़ी आबादी में सिर्फ आधे घंटे ही पानी मिलता है। पानी लोगों को काफी दूर से भरकर लाना पड़ता है। कई गांवों में टैंकरों से पानी आता है। पीने के पानी पर ही लोगों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। नगर निगम में शामिल होने पर शायद यह समस्या दूर हो सके।
हेमंत बेवले
बिजली की बहुत बड़ी परेशानी है। यहां ज्यादा से ज्यादा सिर्फ दस घंटे ही बिजली आती है जबकि हमारा गांव ग्वालियर रोड से बिल्कुल सटा हुआ है। ट्रांसफार्मर खराब होने पर उसको बदलने में कई दिन लग जाते हैं।
दयाराम
बिजली का हाल बेहद खराब है। मामूली खराबी भी कई दिन बाद ठीक होती है। लाइनमैन कभी अपने से खराबी दूर करने नहीं आते।
सतीश भार्गव
सफाई की नियमित व्यवस्था नहीं है। कूड़ा भी समय पर नहीं हटता। नगर निगम में शामिल होने पर शायद यह परेशानी खत्म हो सके।
सत्येंद्र
जगह-जगह सड़कें एवं खड़ंजे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इनकी समय पर मरम्मत नहीं होती। सीवर लाइन की कोई व्यवस्था नहीं है। शहरी सीमा में शामिल होने पर यहां भी लोगों को यह सहूलियत हासिल हो सकेगी।
ओमप्रकाश तिवारी
अंबाबाय वार्ड में शामिल होने वाले गांव अंबाबाय, रुंदकरारी, परवई, पलींदा
क्षेत्रफल हेक्टेयर 1361 520 812 721
आबादी 5815 1077 2591 2129
अभी करना होगा इंतजार
नगर निगम सीमा में शामिल होने से भले ही ग्रामीणों ने विकास की बहुत उम्मीदें बांध ली हों लेकिन उसमें पंख लगने के लिए अभी उनको काफी समय का इंतजार करना पड़ सकता है। शुरुआत में पहले इन सभी जगह पार्षदों के चुनाव कराए जाएंगे। पार्षद के चुने जाने के बाद ही नगर निगम सीमा में मानते हुए यहां निगम से संबंधित विकास कार्य आरंभ होंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर माह तक इस संबंध में अधिसूचना जारी की जा सकती है।