नए नगर आयुक्त को करना होगा चुनौतियों का सामना
झांसी। नवनियुक्त नगर आयुक्त मनोज कुमार को झांसी महानगर में कई चुनौतियों का सामना करना होगा। सबसे बड़ी समस्या स्मार्ट सिटी को विस्तार देना होगा, जिसका खाका खींच तो लिया गया पर अब तक धरातल पर काम नजर नहीं आ रहा है। साथ ही विकास कार्य, नाला सफाई और खराब पड़ी आधुनिक मशीनों को लेकर खड़े होने वाले सवालों से जूझना होगा।
स्मार्ट सिटी को विस्तार देना
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत झांसी महानगर का चयन 23 जून 2017 को हुआ था। स्मार्ट सिटी के तहत पहला काम राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पार्क में सौ फीट का राष्ट्रध्वज लगाने का हुआ था। लेकिन, इसके बाद कोई अन्य काम धरातल पर पूरा होता नजर नहीं आया। इस दरम्यान योजनाओं को मूर्त रूप देने की योजनाएं तैयार की जाती रहीं। शहर में कई स्थानों पर महिलाओं के लिए ‘पिंक टॉयलेट’ बनाने का काम शुरू किया गया। इनमें से दो बीकेडी और बस स्टैंड के पास बनकर तैयार हैं, लेकिन शुरुआत नहीं हो पाई।
नालों पर अतिक्रमण, कैसे हो सफाई
नालों पर अतिक्रमण नाला सफाई अभियान की मुश्किलों को बढ़ा रहा है। इनकी सफाई नगर निगम के लिए चुनौती बनी हुई है। महानगर में 207 छोटे और 20 बड़े नाले हैं, जिनकी सफाई बरसात से पूर्व पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन, अतिक्रमण नालों की सफाई में रोड़ा पैदा कर रहा है। आलम ये है कि कुल 227 नालों में से 200 पर अतिक्रमण है। यही कारण है कि उन नालों को ठीक ढंग से साफ करा पाना मुमकिन नहीं है।
ढाई करोड़ की सुपर शकर मशीन
पहली बार सुभाषगंज के नालों की सफाई के लिए पहुंची उक्त मशीन को जब उपयोग में लिया तो चंद मिनटों के अंदर नाले को कई फुट दूर तक एक ही स्थान पर खड़े रहकर साफ कर दिया गया। उसके बाद आज तक इस मशीन को उपयोग में लेने से जिम्मेदार बच रहे हैं। जबकि, इस मशीन की खासियत यह है कि नाले पर कितना भी अतिक्रमण हो फिर भी नाले को आसानी से साफ कर सकती है।
सॉलिड और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट
महानगर में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट न होने से कचरे के पहाड़ बनना शुरू हो गए हैं। आलम यह है कि कई खंतियां अब तक कचरे से पूरी तरीके से पट चुकी हैं। शहरी क्षेत्र में एकमात्र डंपिंग जोन पंचवटी में है, जहां कचरे का पहाड़ नजर आने लगा है। वर्ष 2018 में उसमें आग लग गई और तब से वह बंद पड़ा है। यह प्लांट इतना बड़ा है कि आसपास के नगर पालिका से निकलने वाले प्लास्टिक वेस्ट को री-साइकिल करने में कारगर है।
कबाड़ हुए रोबोट
नाला साफ करने के लिए लाखों रुपये से खरीदे गए दो रोबोट अब सही होने की स्थिति में नहीं हैं। किसी के टायर गायब हैं तो किसी के आधे से ज्यादा उपकरण। दूसरी ओर नाला क्लीनिंग डंपर का लिफ्टर खराब है। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि यह अब सुधरवाने की स्थिति में नहीं हैं। जबकि, दो रोबोट वर्ष 2017-18 की सदन की बैठक में 50 लाख रुपये की कीमत से खरीदे गए थे। इससे पहले एक रोबोट पहले से ही नगर निगम के सफाई बेड़े में शामिल था।