‘न तुम जीते, न हम हारे, बस यही लगे जयकारे’ कुछ इसी अंदाज में शहर के लोगों ने अयोध्या मसले पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले का स्वागत किया। विरासत में मिली सौहार्द की परंपरा को सभी ने एक दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ाया। शंकाओं के बीच जनजीवन पूरी तरह से सामान्य बना रहा। हर वर्ग की ओर से संयमित आचरण अपनाया गया।
अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की हलचल शहर में सुबह से ही नजर आने लगी थी। शहर के प्रमुख चौराहों, सड़कों और बस्तियों में पुलिस मुस्तैदी के साथ तैनात थी। गली - मुहल्लों के नुक्कड़ों पर जमा लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बिंदु अयोध्या का फैसला बना हुआ था। फैसले को लेकर सभी अपने-अपने तर्क दे रहे थे। जिज्ञासा का भाव सभी में था। सुबह दस बजे से लोगों की टिकटिकी ऑनलाइन न्यूज साइट्स व टीवी पर थी।
ठीक साढ़े दस बजे सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने फैसला सुनाना शुरू कर दिया। आधे घंटे बाद ही तस्वीर पूरी तरह से साफ हो गई। इसके बाद किसी भी ओर से कोई खास प्रतिक्रिया नहीं आई। सभी अपनी रफ्तार से रोजमर्रा के कामकाज में जुटे रहे। उम्मीद के अनुरूप शहर के लोगों ने संयमित आचरण अपनाया। अयोध्या फैसले को लेकर सोशल साइट्स पर भी लोगों की ओर से कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं आई।
दोपहर बारह बजे तक बाजारों में कई दुकानों के शटर बंद रहे, लेकिन इसके बाद स्थिति पूरी तरह से सामान्य हो गई। हालांकि, स्कूलों, सरकारी दफ्तरों और बैंकों की छुट्टी होने की वजह से सड़कों पर आवाजाही कम रही।