शुक्रवार को शहर की मटन और चिकिन ( बकरे और मुर्गे का मांस) की दुकानें भी बंद रहीं। कार्रवाई के डर से दुकानें नहीं खोलीं गईं। इस दौरान संयुक्त टीम ने जांच के दौरान सीपरी बाजार क्षेत्र में खुली एक दुकान को सील कर दिया और दूसरी को बंद करा दिया। उधर, मांस कारोबारियों ने अपर नगर आयुक्त से भेंट कर अपनी समस्याएं बताईं, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी।
नगर निगम ने बुधवार को आदेश जारी कर कहा था कि मांस का अवैध कारोबार करने वाले दुकानें बंद कर दें, यदि जांच में कोई पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश का शुक्रवार को भी असर दिखा। शुक्रवार को स्थिति यह रही कि ओरछा गेट स्थित कसाई मंडी में भैंसा मांस के अलावा शहर के अन्य स्थानों पर संचालित मटन और चिकिन की भी अधिकांश दुकानें बंद रहीं। दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। शुक्रवार को नगर निगम, खाद्य सुरक्षा, तहसील और पुलिस की संयुक्त टीम ने सीपरी बाजार क्षेत्र में चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान आदिल कुरैशी की मीट की दुकान बगैर लाइसेंस के चलती पायी गई, जिसे सील कर दिया गया। लाइसेंस न होने के कारण अखलाक दुकान भी बंद करवा दी गई। टीम में नगर निगम की ओर से पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर के निरंजन, खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुशील सचान, कर अधीक्षक आनंद सिंह, सफाई निरीक्षक अनिल आजाद, लिपिक जहीर अब्बासी शामिल थे।
मांस कारोबारियों ने अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को रखा। कारोबारियों का कहना था कि जब उनके पास मांस बेचने का लाइसेंस है तो उनको जानवर काटने का विकल्प दिया जाए। इस पर अपर नगर आयुक्त ने जिलाधिकारी से बात करने की बात कही। देर रात तक समस्या का कोई हल नहीं निकल सका था।
विकल्प तो दें
नगर निगम मांस बेचने का लाइसेंस तो दे रहा है, लेकिन हमें जानवर काटने का कोई विकल्प नहीं दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में हम कारोबार कैसे करें?
गफ्फार कुरैशी, मांस कारोबारी।
बेरोजगार हो गए
मांस की हर दुकान में तीन से चार श्रमिक काम करते हैं। रोज कमाने वाले मजदूरों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सरकार को इस समस्या का जल्द हल निकालना चाहिए।
अफजाल कुरैशी, मांस कारोबारी।
बासी मांस परोस रहे
महानगर के मांसाहारी होटल और दुकानों में शुक्रवार को फ्रिज में रखा एक दिन बासी मांस की पकाकर परोसा गया। कई होटलों में भी मांस नहीं पका। मांस के शौकीन लोग परेशान रहे।