झांसी। कोरोना महामारी का खौफ लोगों के दिलो दिमाग पर ऐसे छाया हुआ है कि लोग अब अपनों की मौत के बाद मिट्टी में भी जाने से परहेज कर रहे हैं। शहर के प्रेमनगर क्षेत्र के नूर नगर इलाके के मुस्लिम युवाओं ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। इलाके में रहने वाली एक 65 साल की हिंदू बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार में चार लोग भी एकत्र नहीं हो सके तो अंतिम संस्कार का जिम्मा मुस्लिम युवकों ने लिया। शुक्रवार को प्रेमनगर स्थित मुक्तिधाम में हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया।
नूर नगर के रहने वाली उमा भारती (65) व उनका पति पीटर (70) सालों से इलाके में रह रहे थे। कभी कभार इनके रिश्तेदार इनसे मिलने के लिए भी आते थे। लेकिन कुछ माह पहले उमा भारती को पैरालाइज का असर हो गया था। जिसके चलते उनकी तबियत खराब रहने लगी थी। उनके पति पीटर उनकी काफी तीमारदारी करते थे। लेकिन बृहस्पतिवार की रात उमा की मृत्यु हो गई। मृत्यु की खबर लगते ही पीटर ने सभी रिश्तेदारों से संपर्क किया, लेकिन कोरोना के खौफ के चलते अंतिम संस्कार के लिए चार आदमी भी इकट्टा नहीं हो सके। जब इस बात की जानकारी मुहल्ले के मुस्लिम युवकों को हुई तो सभी ने वृद्धा के अंतिम संस्कार करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने अर्थी सहित सभी जरूरी सामान को लाकर प्रेमनगर स्थित शमशान घाट पर हिंदू रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार करने वालों में मोहम्मद आसिफ, जावेद, कदीम मास्टर, अलीम मास्टर, शफ्कत उल्ला, सलीम खान मौजूद रहे।