झांसी। मोंठ थाना क्षेत्र के ग्राम पाड़री निवासी महिला व उसके ड्राइवर की
हत्या के मामले में पुलिस ने परिवार के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।
परिवार की इज्जत व जमीन दूसरे को जाते देख परिवार के लोगों ने ही दोनों की
हत्या की थी। योजना बद्ध तरीके से एक्सीडेंट कर दोनों की जान लेनी थी,
लेकिन सफल न होने पर हत्या कर शव नहर में फेंक दिए थे। इस मामले में मृतका
की पुत्री ने पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन जांच में
परिवार के तीन लोगों की संलिप्तता ही उजागर हुई है।
21 सितंबर को मोंठ
थाना पुलिस ने कानपुर- झांसी हाइवे पर ग्राम अमरा- पाड़री लिंक रोड पर
दुर्घटनाग्रस्त टाटा इंडिका कार नंबर (यूपी 93 के 3441) खड़ी पाई थी। जांच
में पता लगा था कि उक्त कार ग्राम पाड़री निवासी नीमा राजपूत (40) पत्नी
स्व वीर बहादुर सिंह की है। वह 20 सितंबर को अपने ड्राइवर दतिया क्षेत्र के
उन्नाव बालाजी थाना क्षेत्र के ग्राम तरगुवां निवासी रामजी विश्वकर्मा
पुत्र सरमन विश्वकर्मा के साथ सुबह दस बजे झांसी दवा लेने गई थी। पुलिस ने
दोनों की खोजबीन शुरू की। 22 सितंबर को समथर थाना क्षेत्र के ग्राम छपार के
निकट बेतवा नहर में रामजी का शव पड़ा मिल गया था। 23 सितंबर को नीमा का शव
भी ग्राम साकिन के पास बेतवा नहर से बरामद कर लिया गया था।
इस प्रकरण
में मृतका की पुत्री काजोल ने मोंठ थाने में दी तहरीर में बताया था कि उसके
पिता की मृत्यु वर्ष 2011 में हो गई थी। उसके भाई का देहांत सड़क दुर्घटना
में हो गया था। इसके बाद पिता के परिवार के लोग मां व ड्राइवर से रंजिश
मानने लगे थे। संपत्ति हड़पने के लिए मां को गांव छोड़ने के लिए कहते थे।
धमकियां भी दी जाती थीं। इस डर से मां ने उसे अपने परिजनों के पास उरई रहने
के लिए भेज दिया था। काजोल ने परिवार के लोगों पर ही हत्या का आरोप लगाया
था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर जगदीश राजपूत पुत्र स्व रामनाथ राजपूत, दशरथ
राजपूत, राजेंद्र राजपूत, विजय बहादुर पुत्रगण जगदीश राजपूत, बाबी उर्फ
गजेंद्र राजपूत पुत्र दशरथ राजपूत के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया
था।
शनिवार को पुलिस लाइन सभागार में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र
दुबे ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि इस मामले में पुलिस ने आशीष
धर्म कांटा बिजौली के पास से बॉबी व विजय बहादुर को पकड़ लिया। पूछताछ में
दोनों अभियुक्तों ने बताया कि पति की मृत्यु के बाद नीमा व ड्राइवर की
नजदीकियां बढ़ रही थीं। वह कोर्ट मैरिज करना चाहते थे। रिश्तेदारों में
बदनामी हो रही थी और जमीन से भी हाथ धोना पड़ रहा था, इससे परिवार के सदस्य
नाराज थे। इसी कारण दो माह पूर्व योजना बनाई गई कि जब दोनों एक साथ कहीं
घूमने जाएं तो सुनसान स्थान पर डंपर से एक्सीडेंट कर कार में आग लगा दी
जाए। इस कार्य के लिए जालौन में रहने वाले एक रिश्तेदार की मदद से कोंच
थाना क्षेत्र के चंदुर्रा निवासी ठाकुर पाल से डंपर क्रमांक यूपी 95 बी
2085 को मांगा गया। बीस सितंबर को रात्रि करीब ग्यारह बजे नीमा अपने
ड्राइवर के साथ कार में बैठकर झांसी से ग्राम पाड़री आ रही थी। सुनियोजित
ढंग से अमरा व पाड़री के बीच सुनसान स्थान पर डंपर ने कार में टक्कर मार
दी। डंपर विजय बहादुर चला रहा था। चूंकि, सामने से आ रहे डंपर को देख कर
रामजी ने कार को धीमा कर लिया था, इस कारण टक्कर लगने के बाद भी दोनों बच
गए।
इसके बाद बॉबी, नरेंद्र व विजय बहादुर ने लोहे के रॉड व डंडों से
प्रहार कर दोनों को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद दोनों के शव डंपर में
रखे और बेतवा नहर में फेंक दिए। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त डंपर, लोहे का
राड, डंडा व मृतका नीमा के नाम के कुछ कागजात बरामद कर लिए हैं। पुलिस ने
फरार नरेंद्र व डंपर मालिक ठाकुर पाल की तलाश शुरू कर दी है। वहीं, मुकदमे
में नामजद दशरथ राजपूत व राजेंद्र राजपूत की भूमिका की जांच की जा रही है।
घटना के खुलासे के मौके पर एसपी ग्रामीण दिनेश सिंह, सीओ मोंठ सोमेन वर्मा,
सीओ गरौठा अविनाश गौतम मौजूद रहे।