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Jhansi News: करंट की चपेट में आने से मां और दो बेटों की मौत

Tue, 11 Mar 2025 01:02 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
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कई घंटे तक खेत में अचेत हाल में पड़े रहे तीनों, गेहूं की फसल की सिंचाई करते समय हुआ हादसा
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी/बंगरा। उल्दन थाना के बंगरा इलाके में सोमवार को गेहूं की फसल की सिंचाई करते समय करंट की चपेट में आने से मां और उसके दोनों बेटों की मौत हो गई। एक बेटा पीडब्यूडी में कर्मचारी था। खेत में तीनों के शव कई घंटे पड़े रहे। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने विद्युत आपूर्ति बंद कराकर शव को खेत से बाहर निकलवाया। पुलिस खेत में करंट आने की वजह तलाश रही है।



बंगरा के बड़ी माता मंदिर के पास रहने वाली हरकुंवर (69) सोमवार सुबह करीब छह बजे बड़े बेटे काशीराम (45) के साथ खेत में सिंचाई करने गई थीं। खेत में नलकूप का तार टूटकर पड़ा था। इससे पूरे खेत में करंट फैल गया। मां-बेटे उसी करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए।
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दोपहर करीब 12 बजे छोटा बेटा नरेंद्र (34) भी खेत में पहुंचा। मां एवं बड़े भाई की हालत देख वह भी खेत की ओर दौड़ा। खेत में पहुंचते ही वह भी करंट की चपेट में आने से झुलस गया। कुछ देर बाद काशीराम की पत्नी रामा देवी खेत में पहुंचीं। झुलसी अवस्था में तीनों को देख वह चीख उठी। खेत में जाने की कोशिश करने पर उसे भी करंट का झटका लगा। शोर-शराबा सुनकर ग्रामीण जुट गए। उल्दन थाना प्रभारी दिनेश कुरील, चौकी प्रभारी दिलीप पांडेय भी पहुंच गए। तार हटाकर तीनों को बाहर निकाला गया। हरकुंवर के हाथ बुरी तरह झुलसे थे। काशीराम एवं नरेंद्र भी बुरी तरह झुलसे थे। तीनों को सीएचसी ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।





तीनों के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। खेत में करंट किस वजह से फैला, इसकी भी जांच कराई जा रही है। - अजय कुमार श्रोत्रीय, सीओ, टहरौली


तीन मौत से गांव में मातम, घरों में नहीं जले चूल्हे

तीन मौत होने से गांव में मातम पसर गया। आसपास के गांव के लोग भी रोते-बिलखते परिजनों को ढांढस देने पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि हरकुंवर का संयुक्त परिवार था। काशीराम पत्नी रामा देवी एवं बेटे सुनील (24) एवं राहुल (18) के साथ रहता था। सुनील की शादी हो चुकी। वहीं, नरेंद्र के बच्चे अभी छोटे-छोटे हैं। नरेंद्र के परिवार में पत्नी प्रीति समेत बेटा आदर्श (5) एवं साहिल (2) हैं। हादसे के समय काशीराम की पत्नी रामा देवी खेत में जा पहुंची थी जबकि नरेंद्र की पत्नी प्रीति घर पर थी। हादसे के बाद प्रीति एवं रामा का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। प्रीति बार-बार पति को वापस बुलाने की गुहार लगा रही थी। घर में मचे कोहराम को देखकर वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो आईं। एक साथ तीन मौत होने से पूरे गांव में मातम पसरा रहा। लोगों ने घरों में चूल्हे तक नहीं जलाए।



मृतक आश्रित के तौर पर बड़े बेटे को मिली थी नौकरी
काशीराम के पिता धर्मदास लोक निर्माण विभाग में नौकरी करते थे। 18 साल पहले धर्मदास की मौत के बाद काशीराम को मृतक आश्रित के तौर पर नौकरी मिल गई। काशीराम बंगरा ब्लॉक में तैनात थे। छोटे भाई नरेंद्र के जिम्मे खेती-किसानी थी। परिवार के पास करीब नौ बीघा जमीन है। इससे पूरे परिवार का पालन-पोषण होता है।
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मौत बनकर जगह-जगह खुले में लटक रहे बिजली के तार

करंट की चपेट में आने से तीन मौत ने ग्रामीणों को झकझोर दिया। इसके बावजूद विद्युत विभाग के अफसरों की नींद टूटती नहीं दिखाई पड़ती। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही से खुले तार पोल से जुड़े हुए हैं। अक्सर इस वजह से खेत में करंट फैल जाता है। कुछ दिन पहले भिटौरा गांव में भी एक किसान की करंट लगने से मौत हो चुकी। इसके बावजूद विद्युत अभियंता कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।
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