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Jhansi News: राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्टेडियम के सर्वाधिक मुक्केबाजों ने हासिल किए पदक

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संवाद न्यूज एजेंसी

झांसी। मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में तीन से छह जून तक राज्यस्तरीय जूनियर बालक-बालिका बॉक्सिंग प्रतियोगिता हुई। इसमें स्टेडियम के बॉक्सिंग छात्रावास के मुक्केबाजों ने सबसे अधिक गोल्ड मेडल जीते। विजेता मुक्केबाजों ने अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे वे मुश्किलों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बॉक्सिंग का नियमित अभ्यास जारी रखा। राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में पदक लाने वाले खिलाड़ी अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक लाने की की तैयारी कर रहे हैं।



ये बोले मुक्केबाज ...



- बहराइच के रहने वाले प्रबल प्रताप सिंह पिछले चार साल से स्टेडियम के बाॅक्सिंग छात्रावास में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। बताया कि स्कूल गेम्स दिल्ली में बॉक्सिंग प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। इसके बाद गृह जनपद में, वाराणसी और हाल ही में झांसी में हुई राज्यस्तरीय बाॅक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया है। उनके पिता कंपाउंडर और मां प्राइवेट नर्स हैं। उनके माता पिता की प्रेरणा से ही यहां तक पहुंचे है। उनका सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में भारत की ओर से खेले और मेडल जीत कर अपने माता पिता का नाम रोशन करें।
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- सहारनपुर निवासी पृथ्वी ठाकुर स्टेडियम के हॉस्टल में रहकर चार साल से मुक्केबाजी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वह बताते हैं कि स्कूल के दिनों में मुक्केबाज मुहम्मद अली के वीडियाे देखा करते थे और दोस्तों से हमेशा बॉक्सिंग के बारे में चर्चा करते रहते थे। वह वाराणसी स्कूल स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, असम में ओपन राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में रजत पदक, नोयडा में राष्ट्रीय ओपन बॉक्सिंग प्रतियोगिता में कांस्य पदक, झांसी में राज्यस्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। उनके पिता एक किसान हैं। मुक्केबाजी के लिए परिवार का पूरा सहयोग रहा हैं।



- वाराणसी के शुभम यादव स्टेडियम के बॉक्सिंग छात्रावास में दो साल से मुक्केबाजी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वह बताते हैं कि वह काफी मोटे हुआ करते थे वजन घटाने के लिए स्टेडियम गए। वहां दूसरे मुक्केबाजों को देखकर उन्हें भी इसमें रुचि आने लगी। उन्होंने वाराणसी में आयोजित स्कूल स्टेट बॉक्सिंग प्रतियोगिता में रजत पदक, बहराइच में एशियन स्टेट ट्रायल में गोल्ड मेडल, झांसी में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। उनके पिता पेंटर का काम करते हैं। वह ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का परचम लहराना चाहते हैं।



- हिमांशु यादव वाराणसी के निवासी हैं। वह स्टेडियम के बॉक्सिंग छात्रावास में एक वर्ष से मुक्केबाजी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। शुरुआत से ही मुक्केबाजी का शौक रहा है। उन्होंने वाराणसी में स्कूल स्टेट बॉक्सिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक व झांसी में आयोजित राज्य स्तरीय जूनियर बालक बालिका बॉक्सिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। उनके पिता दूध बेचने के काम करते हैं। उनका सपना है कि वह ओलंपिक में खेले और मेडल जीतकर भारत व अपने माता पिता का नाम रोशन करें।

- सत्यम गुप्ता कुशीनगर के निवासी हैं। उनके पिता ने अकादमी में प्रवेश दिलवा दिया । उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी और फिर ट्रायल के दौरान बॉक्सिंग छात्रावास में चयन हो गया। छात्रावास में एक साल से मुक्केबाजी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बहराइच में राज्यस्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, झांसी में राज्यस्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। उनके पिता ऑटो चलाते हैं वह मुझे राष्ट्रीय स्तर का मुक्केबाज बनाना चाहते हैं।
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- झांसी के शहर कोतवाली के पास रहने वाली इकरा खान ने बताया कि मुक्केबाजी करने का उन्हें काफी शौक है। मुस्लिम परिवार से होने के कारण शुरुआत में रिश्तेदार और परिवार के लोग काफी मुक्केबाजी करने का विरोध करते थे। लेकिन मेरी मां मुझे काफी प्रोत्साहित करती थीं। इकरा ने झांसी में हुई राज्यस्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। खेल के अलावा उनकी पढ़ाई में भी खासी रुचि है उनका कहना है कि वह प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश सेवा करना चाहती हैं।
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