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मानक से ज्यादा रंग डाला तो खून, प्रजनन क्षमता में कमी हो सकती

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झांसी। मानक से ज्यादा रंगों के मिश्रण से बनी मिठाइयां, नमकीन सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। इनके सेवन से खून से लेकर प्रजनन क्षमता तक में कमी आ सकती है। ऐसे में होली के पर्व में भी मिठाइयों, नमकीनों समेत खाद्य पदार्थों की खरीद करते समय इसका भी ध्यान रखना जरूरी है।
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तीज-त्योहारों पर अलग-अलग रंग मिलाकर विभिन्न खाद्य पदार्थ बेचे जाते हैं। इन रंगों में केमिकल का भी इस्तेमाल होता है। ऐसे में मानक से ज्यादा रंगों के मिश्रण से युक्त खाद्य पदार्थ खाना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। खाद्य विश्लेषक डॉ. अनूप चंद्रा ने बताया कि कुछ वैज्ञानिकों ने खाद्य पदार्थों में रंगों के उपयोग पर किए गए शोध में चौकाने वाले तथ्य पेश किए हैं। इससे पता चला है कि खाद्य रंगों से शरीर पर विभिन्न विषैले प्रभाव पड़ सकते हैं। इसमें बालों का झड़ना, रक्त में कमी, वृक्कों में हानि और गुणसूत्रीय परिवर्तन के साथ प्रजनन क्षमता में कमी जैसे विकार पाए गए हैं। साथ ही मोटापे में बढ़ोतरी और उसी तरह के लक्षण, बीमारियां पाई गई हैं। हाल ही में किए गए विभिन्न शोधों से पता चला है कि गैन अनुमति रंगों जैसे मेटानिल येलो, लेड क्रोमेट, रोडामीर, बटर येलो, सुडान-3 तथा सुडान-4 का खाद्य सामग्री में उपयोग गंभीर स्वास्थ्य परिणामों को जन्म दे रहा है। इसलिए होली पर खाद्य पदार्थों की खरीद करते समय विशेष सावधानी बरतें।
ये है आंकड़ा
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं विनियमन 2011 द्वारा अनुमतित खाद्य रंगों की सीमा निर्धारित की गई है। प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों के आधार पर पता चला है कि देशभर में 20 प्रतिशत से अधिक मिठाइयों और 50 फीसदी से ज्यादा नमकीनों के खाद्य नमूनों में अनुमतित खाद्य रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो कि मानक से अधिक है। त्योहारों पर किए गए सर्वेक्षण से पता लगा है कि ट्रेट्राजीन और सनसेट येलो का उपयोग अधिक किया जा रहा है। होली पर भी विक्रय होने वाली कचरी में बहुतायत में गैर अनुमतित रंगों का प्रयोग किया जा रहा है, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
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