झांसी। हाथरस कांड के बाद भी पुलिस-प्रशासन की नींद नहीं टूटी। दिनदहाड़े शहर के बीचोबीच सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज के हास्टल में कानून व्यवस्था और सुरक्षा के तमाम दावों की धज्जियां उड़ीं। कोचिंग से लौट रही छात्रा अपने दोस्त से बात कर रही थी इसी बीच पॉलीटेक्निक के करीब 10 से 15 छात्र दरिंदों की तरह उन्हें हॉस्टल में खींच ले गए। छात्रा गिड़गिड़ाते रही, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। ग्वालियर हाईवे को जोड़ने वाली सड़क पर दिन भर जबरदस्त आवाजाही रहती है। लेकिन सड़क से हॉस्टल के अदंर तक बेटी की चीखें किसी को सुनाई नहीं दीं। कानून के रखवालों का रसूख और डर नहीं दिखा। वाकया जिसने भी सुना वह पूछ रहा था कि क्या बेटियां पढ़ाई छोड़ दें या सड़कों पर निकलना छोड़ दें। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर यह सवाल और भी शर्मसार कर रहा था।
अनलॉक के बाद बेटी ने महीनों बाद घर से निकलना शुरू किया था। वो अपनी पढ़ाई नियमित शुरू होने से खुश थी। कोचिंग में पढ़कर अभी वह पॉलीटेक्निक कॉलेज के पास पहुंची थी। रास्ते में सहपाठी से बात करने के लिए रुक गई। रोज की तरह वहां झुंड में घूम रहे पॉलीटेक्निक के करीब 12 से 15 छात्र उन्हें देख वहां पहुंच गए और दोनों को घेर लिया। फिर शुरू हुआ घिनौना खेल। बिना किसी की परवाह किए पालीटेक्निक कॉलेज के छात्र अचानक हैवान बन गए। तकरीबन आधे घंटे तक पालीटेक्निक के छात्रावास में बेटी की चीखें गूंजती रहीं।
बेटी आरोपी छात्रों से रहम की भीख मांगती रही। उसने आरोपी छात्रों को भैया तक कहकर संबोधित किया और पैरों पर गिरकर गिड़गिड़ाई। लेकिन, आरोपियों पर हैवानियत सवार थी। उनका दिल नहीं पसीजा। इस दरम्यान आरोपियों ने दोनों से दो हजार रुपये भी वसूले। अश्लील वीडियो भी बनाया। इसी दौरान आरोपियों में से एक छात्र लड़की को घसीटकर हॉस्टल में एकांत में ले गया और उसने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दे डाला। बाकी आरोपी भी इसी तैयारी में थे। लेकिन, ऐन वक्त पर पुलिस का एक सिपाही वहां पहुंच गया, जिसे देखकर आरोपियों में भगदड़ मच गई।