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लखनऊ पहुंचे विधायक, चुनाव बाद हो सकता है बड़ा फेरबदल

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झांसी। ग्राम दतावली में हुए बवाल के बाद पुलिस की कार्रवाई से नाराज गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत रविवार को लखनऊ पहुंच गए। सूत्रों का कहना है कि यहां वह पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और शासन के अफसरों से मुलाकात कर पूरा वाक्या बताएंगे। वहीं, विधायक के सामने से फरियादियों को उठाने के मामले में पुलिस घिर गई है। शासन तक मामला पहुंच जाने के बाद अब पंचायत चुनाव के बाद आचार संहिता खत्म होते ही जिले के अफसरों पर गाज गिर सकती है।
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झांसी में 15 अप्रैल को हुए पंचायत चुनाव में गरौठा विधानसभा के गांव दतावली में जमकर बवाल हुआ था। यहां फर्जी मतदान के आरोप लगे थे। पथराव भी किया गया था। भीड़ ने मतदान केंद्र से मतपेटियां निकाल कर बाहर तोड़ दी थीं। इस मामले में पंद्रह नामजद और 120 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस की इस कार्रवाई का पहले ही दिन से विरोध शुरू हो गया था।
ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस ने एक पक्षीय कार्रवाई की है। शुक्रवार को दतावली ग्राम के प्रधान प्रत्याशी समेत एक दर्जन से ज्यादा समर्थक गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत के पास कलेक्ट्रेट परिसर स्थित उनके अधिवक्ता चैंबर पर पहुंचे थे। विधायक ने एसएसपी से बात कर लोगों की फरियाद सुनने को कहा। विधायक के मुताबिक एसएसपी ने उन्हें शाम साढ़े सात बजे वार्ता के लिए बुलाया था। लेकिन इससे पहले ही एसओजी की टीम कलेक्ट्रेट पहुंच गई और महिला प्रधान प्रत्याशी समेत समर्थकों को उनके सामने चैंबर से उठाकर ले गई। कुछ फरियादियों को भी पुलिस पकड़ कर ले गई। उन्होंने फोन पर अफसरों से बात की, मगर कोई हल नहीं निकला। रात दो बजे विधायक ग्रामीणों की आवाज उठाते हुए नवाबाद थाने में धरने पर बैठ गए। मामला शासन तक पहुंचा तो अधिकारियों के पास फोन घनघनाने शुरू हो गए। बाद में अधिकतर लोगों को थाने से छोड़ दिया गया, जबकि चार को जेल भेज दिया गया।
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अब गरौठा विधायक के रविवार को लखनऊ पहुंच जाने से तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि विधायक की पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और आला अफसरों से बात हुई है। ऐसे में पंचायत चुनाव के बाद बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
छूटे हुए लोगों की कराई गई डॉक्टरी
दतावली प्रकरण में पकड़े गए ग्रामीणों ने छूटने के बाद पुलिस पर थाने में मारपीट का आरोप लगाया था। जख्म दिखाने पर भीड़ आक्रोशित हो गई थी और पुलिस के अफसरों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी थी। बताया गया कि इन लोगों की डॉक्टरी कराई गई है। ऐसे में अब पुलिस अफसरों को जवाब देना होगा कि जब यह आरोपी नहीं थे, तो इन्हें पकड़ा क्यों गया। बाद में थाने में मारपीट क्यों की गई।
‘विधायक नहीं होते तो जेल भेज देती पुलिस’
थाने से छूटने के बाद ग्रामीणों ने विधायक से मुलाकात की। ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस तो बेवजह जेल भेजना चाहती थी। यदि विधायक उनके लिए थाने में धरने पर नहीं बैठते तो पुलिस बिना किसी जुर्म के ही उन्हें जेल भेज देती।
पुलिस कहती रही मीडिया के सामने मत आने दीजिए
नवाबाद थाने में गरौठा विधायक से पुलिस ग्रामीणों को छोड़ने की बात कहते हुए बार-बार एक बात दोहराती रही कि लोगों को मीडिया के सामने मत आने दीजिए। अगर ग्रामीणों द्वारा पुलिस पर लगाया गया पिटाई का आरोप सही है तो शायद पुलिस की सोच यही थी कि कहीं ग्रामीण अपनी चोटें न दिखाने लगें।
शासन भी अफसरों से संतुष्ट नहीं
पंचायत चुनाव के दौरान पहले बवाल और फिर सत्ताधारी दल के विधायक से सीधे टकराव लेने से शासन भी जिले के अफसरों से संतुष्ट नहीं है। शासन के आला अफसरों ने जिले के अधिकारियों से बात करके अपनी नाराजगी भी जताई है। वहीं, विधायक के साथ में दूसरे जनप्रतिनिधियों के उतर आने से पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी भी अफसरों से नाराज हैं।
सभी खिलाफ थे तो मिलकर कैसे करेंगे बूथ कैप्चरिंग?
बताया गया कि दतावली गांव में दस प्रधान प्रत्याशी एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में थे। विधायक का कहना था कि पुलिस ने विपक्षी पार्टी के एक प्रत्याशी को छोड़कर नौ प्रत्याशी व उनके परिजनों पर बूथ कैप्चरिंग का आरोप लगा दिया। उन्होंने सीधा सवाल किया कि जब सभी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे तो नौ प्रत्याशी मिलकर कैसे बूथ कैप्चरिंग कर सकते हैं? उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि हिस्ट्रीशीटर प्रत्याशी के साथ पुलिस खड़ी है।
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