जिला अस्पताल में सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से अपनों का उपचार कराने आने वाले लोगों को आसरा देने के लिए बनाए गए रैन बसेरा पर ठेकेदार का कब्जा है। तीमारदारों को यहां मांगने पर भी रुकने के लिए कमरे नहीं मिलते हैं। ठेकेदारों ने सभी कमरों में कुछ कमरों में अपना सामान भर रखा है और बाकी में कब्जा कर रखा है। स्थिति यह है कि यहां बना रसोई घर पिछले तीन साल से बंद है।
झांसी विकास प्राधिकरण ने जिला अस्पताल में 2010 में रैन बसेरा बनवाया था। तीमारदारों की सुविधा के लिए यहां रसोई घर भी बनाया गया था। लेकिन, यह सुविधाएं आम लोगों के लिए सफेद हाथी साबित हो रही है। जिला अस्पताल के इस रैन बसेरा में बने आठ कमरों में आम लोगों को जगह नहीं दी जाती है। इन कमरों पर अस्पताल में विभिन्न काम करने वाले ठेकेदारों का कब्जा है। कुछ कमरों में सामान भरा हुआ है तो कुछ में यह लोग खुद या अपने कर्मचारियों का निवास बनाए हुए हैं। यही हाल रसोई घर का भी है। यहां बने शौचालय का भी उपयोग आम लोगों को नहीं करने दिया जाता है। स्थिति यह है कि तीमारदार खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं।
रैनबसेरा के लिए ऐसे करें आवेदन
कोई भी व्यक्ति जिसका मरीज जिला अस्पताल में भर्ती है वह मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से अनुमति लेकर रैनबसेरा में रुक सकता है। यह सुविधा नि:शुल्क है और किसी भी मरीज के तीमारदार को मिल सकती है। रैनबसेरा में अस्पताल की ओर से सिर्फ कमरा दिया जाएगा, बिस्तर व अन्य सामान तीमारदार को अपना लाना होगा।
भेज रहे हैं नोटिस
रैनबसेरा में रुकने के लिए कोई कमरे की मांग करेगा तो उसे अवश्य उपलब्ध कराया जाएगा। रसोईघर पिछले तीन सालों से बंद है। खाली होेने के कारण कुछ कमरों में सामान रख दिया गया है। अवैध रूप से जो भी ठेकेदार रह रहे हैं उनमें से एक को कमरा खाली करने के लिए नोटिस भेजा गया है तथा बाकियों को भेजा जा रहा है।
डा. रमेश चंद्रा
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
जिला अस्पताल