झांसी। बुंदेलखंड में भी दुग्ध उत्पादन में बढ़ोत्तरी हो रही है। यहां बबीना, बामौर एवं मोंठ इलाकों से रोजाना करीब बीस हजार लीटर दुग्ध संग्रह हो रहा है। झांसी में ही इसे बढ़ाकर एक लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर महीने में इसकी शुरुआत की थी।
दुग्ध उत्पादन के मामले में बुंदेलखंड हमेशा पिछड़े इलाकों में शुमार रहा है। वाजिब पैसा न मिलने एवं पशुओं का रखरखाव महंगा होने के नाते मजबूरी में पशुओं को छुट्टा छोड़ दिया जाता है। झांसी, जालौन, बांदा, हमीरपुर जैसे इलाकों में अन्ना पशुओं की समस्या विकराल हो चुकी है। इससे निपटने के लिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई। ग्रामीण अजीविका रोजगार मिशन के जरिए बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर का गठन हुआ। दिसंबर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उद्घाटन करने के बाद से एजेंसी ने काम शुरू किया। खास बात यह रही कि समूह में सिर्फ महिलाओं को जोड़ा गया।
महिला पशुपालकों के नाम से ही कॉर्ड बनाए गए। अभी तक 11 हजार महिलाएं सदस्य बनाई जा चुकीं। भुगतान सीधे इन सदस्यों के खाते में आता है। समूह से जुड़ी महिलाओं को नियमित आय आरंभ हो गई। निदेशक डॉ.ओपी सिंह के मुताबिक रोजाना करीब 20 हजार लीटर दुग्ध संग्रह हो रहा है। बबीना, बामौर एवं मोंठ के ग्रामीण इलाकों से दुग्ध संग्रह करके इसे पुनावली, पूंछ एवं गढ़मऊ में बने केंद्र में भेजा जाता है। उनका कहना है दुग्ध संग्रह का कार्य झांसी, हमीरपुर, जालौन, चित्रकूट एवं बांदा के छह सौ गांव तक बढ़ाना है। इसके बढ़ने से बुंदेलखंड में दुग्ध उत्पादन में इजाफा होने के साथ ही पशुपालन में दिलचस्पी भी बढ़ेगी। निदेशक डा.सिंह के मुताबिक संग्रह बढ़ने पर झांसी में दुग्ध वितरण भी आरंभ किए जाने की योजना है।