झांसी। बुंदेलखंड के कई जिलों में आमतौर पर तमंचे से ही घटनाएं होती थीं, लेकिन समय बीतने के बाद ही बदमाश भी हाईटेक हो गए हैं। बदमाशों के पास पिस्टल से लेकर ऑटोमेटिक चलने वाले अवैध हथियार की खेप बिहार से पहुंच रही है। कई जिलों में सक्रिय डीलरों के माध्यम से अकाउंट में रकम पहुंचने के बाद असलहा पहुंच रहा है। आंकड़े भी इस बात की गवाही दे रहे हैं। रेंज की पुलिस ने डेढ़ साल में 263 से अधिक पिस्टलें बरामद की हैं।
पिछले कुछ सालों में पिस्टल की मांग तेजी से बढ़ी है। सेमी ऑटोमेटिक हथियार होने के साथ ही साइज में छोटी होने के कारण बदमाश इसका उपयोग करते हैं। जिस कारण असलहों में इसकी ज्यादा डिमांड है। 0.32 बोर, 0.30 बोर और 9 एमएम में यह पिस्टल उपलब्ध है। पिस्टल की कीमत 15 से 70 हजार तक है। इनमें सबसे ज्यादा कीमत 9 एमएम पिस्टल की है। तमंचे व देसी बंदूकें तो छोटे-मोटे यंत्रों के सहारे बन जाते हैं, लेकिन पिस्टल या रिवाल्वर को बनाने के लिए खराद मशीनों की जरूरत होती है। जिसके जरिए कलपुर्जों को आकार दिया जा सके।
एक पिस्टल के साथ दो मैगजीन
अवैध पिस्टल विक्त्रस्ेता एक पिस्टल के साथ दो मैगजीन देते हैं। एक मैगजीन पिस्टल में फिट होती है और दूसरी उसके साथ अलग से दी जाती है। इसके बाद भी यदि कोई अतिरिक्त मैगजीन लेना चाहता है तो उसे तीन हजार रुपये अतिरिक्त देने पड़ते हैं और उसे मैगजीन उपलब्ध हो जाती है।
चार सौ रुपये तक का कारतूस
पिस्टल के कारतूस महंगे मिलते हैं। इसमें 0.32 बोर का देशी कारतूस ही अवैध तरीके से 200 रुपये का मिलता है, जिसकी बाजार में कीमत करीब 100 रुपये है। प्रतिबंधित बोर 9 एमएम और 0.30 बोर का कारतूस 400 रुपये तक का मिलता है। यह कारतूस हथियार तस्कर ही उपलब्ध कराते हैं या कुछ बदमाशों की सेटिंग कुछ पुलिस वालों से होती है, जिनके द्वारा कारतूस मिल जाते हैं।
बिहार सबसे बड़ा केंद्र
पिस्टल की मुख्य आपूर्ति बिहार के मुंगेर से हो रही है। मुंगेर की पिस्टल सस्ती भी हैं। मुंगेर से आनी वाली पिस्टल अधिकतम 30 हजार रुपये में मिल जाती है, जबकि नेपाल या पंजाब से आनी वाली पिस्टल तकनीकी तौर पर ज्यादा एडवांस और भरोसेमंद होती है, जिनकी कीमत 50 हजार रुपये तक होती है।
वारदातों में पिस्टल आईं सामने
अधिकतर बदमाश पिस्टल का प्रयोग कर रहे हैं। एक साल में जितनी भी फायरिंग की घटनाएं हुई हैं, उनमें चाहे हत्या, लूट हो या जानलेवा हमला, अधिकांश में हमलावरों ने पिस्टलों का प्रयोग किया है। इससे साफ है कि अब बदमाश एक फायर करने वाले तमंचे पर नहीं, बल्कि लगातार छह राउंड फायर करने वाले पिस्टल पर भरोसा करते हैं।
कौन सा हथियार चाहिए
रेंज में बड़े पैमाने पर असलहों की बिक्त्रस्ी हो रही है। पिस्टल चाहिए, तमंचा चाहिए या फिर कुछ और सब कुछ यहां मिलता है। हथियारों की मार्केट बिहार, मेरठ व दिल्ली में पनप रही हैं। पिस्टल चाहिए तो मुंगेरी पिस्टल मशहूर है। अधिकतर बड़े शूटर इसी पिस्टल का इस्तेमाल करते हैं। इनके दाम इनकी क्वालिटी पर निर्भर करते हैं। नाइन एमएम .28, .32 की पिस्टल भी उपलब्ध करा दी जाती हैं। शूटर्स हथियारों के इन दलालों से ही खरीदारी करते हैं। फिर एक के बाद एक वारदात को अंजाम दिया जाता है।
हथियार के रेट (रुपये में)
पिस्टल - बीस हजार से तीस हजार
मुंगेरी - पंद्रह से बीस हजार
विदेशी पिस्टल- चालीस हजार से अधिक
तमंचा - दो से तीन हजार के बीच
स्टाइलिश तमंचा - चार हजार से अधिक
डेढ़ साल में बरामद असलहा
झांसी का आंकड़ा
तमंचा 187
पिस्टल 98
ललितपुर का आंकड़ा
तमंचा 111
पिस्टल 44
जालौन का आंकड़ा
तमंचा 176
पिस्टल 129
अवैध हथियार बरामद होने पर पुलिस कार्रवाई करती है। ऐसे अपराधियों को जेल भी भेजा है। ऐसे कई सरगनाओं पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है। इन मामलों में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है।
राहुल मिठास, अपर पुलिस अधीक्षक