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5 अरब 55 करोड़ खर्च होने के बाद भी विकास की परियोजनाएं अधूरी

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एरच बांध बहुउद्देश्यीय परियोजना - फोटो : REPORTERS
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झांसी। क्षेत्र के विकास के लिए सरकारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही ने सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया। इसका अंदाजा जिले की चार परियोजनाओं को देखकर लगाया जा सकता है। पानी, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी इन अहम परियोजनाओं पर साढ़े पांच अरब रुपये की भारी भरकम धनराशि खर्च की जा चुकी है। बावजूद, ढांचा तक पूरा तैयार नहीं हो पाया है। आम जनमानस को लाभ मिलना तो अभी दूर की बात है। काम पूरा करने के लिए अब सरकार से और बजट मांगा जा रहा है, जो निकट भविष्य में मिलता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में खर्च की हुई रकम पानी में जाती जान पड़ रही है।
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एरच बांध बहुउद्देश्यीय परियोजना
क्षेत्र में सिंचाई और पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 2014 में एरच क्षेत्र के जुझार गांव में एरच बांध बहुउद्देश्यीय परियोजना की आधारशिला रखी गई थी। बांध पर बिजली बनाने की भी योजना था। इसका काम 2018 में पूरा किए जाने की मियाद तय की गई थी। बांध के निर्माण के लिए सरकार ने तीन किस्तों में 367 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए, जो खर्च भी हो गए। बांध का काम पचास फीसदी ही पूरा हो पाया था कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया। वित्तीय अनियमितताएं सामने आने पर जांच शुरू कर दी गई, जिससे काम रुक गया। दो साल बीतने के बाद भी जांच का कोई परिणाम सामने नहीं आया है।
लक्ष्मी ताल सौंदर्यीकरण योजना
लक्ष्मी तालाब को सुंदर बनाने की योजना 2015 में शुरू हुई थी। योजना के लिए 54 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था और 46 करोड़ रुपये जलनिगम दे दिए गए थे। योजना के तहत तालाब में गिरने वाले नालों के पानी को रोकना, तालाब की सफाई, नाले के पानी को साफ करने के लिए तीन सीवेज पंपिंग स्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण, तालाब से ट्रीटमेंट प्लांट तक पाइप लाइन डालने का काम किया जाना था। लेकिन, काम पूरा होने से पहले मिला हुआ बजट खत्म हो गया। अब काम पूरा करने के लिए 46 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। जबकि, ऐतिहासिक मनोरम स्थल लक्ष्मीताल वर्तमान में बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है।
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500 बेड का अस्पताल
मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार अखिलेश यादव 27 सितंबर 2012 को झांसी आए थे। यहां उन्होंने मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। तब सामने आया था कि मरीजों के लिए अस्पताल में पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। सुविधाएं बढ़ाने के लिए उन्होंने मेडिकल परिसर में 500 बेड का नया अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। घोषणा को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई थी। काम 2018 में पूरा होना था और इस पर एक अरब अट्ठाइस करोड़ रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं। बजट खत्म हो चुका है। दो साल से काम रुका पड़ा है। विलंब होने की वजह से लागत और बढ़ गई है। 42 करोड़ की और दरकार है, जो मिल नहीं रही है।
अरबन हाट
हस्तशिल्पियों को उनके उत्पादों की बिक्री के लिए उचित मंच देने के उद्देश्य से साल 2006 में किले की तलहटी में अरबन हाट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। पांच एकड़ के भूखंड में हाट का निर्माण 2010 में शुरू हुआ। दो साल काम चलने के बाद रुक गया। सालों काम ठप पड़ा रहा। दो साल पहले एक बार फिर शुरू किया गया। इस पर अब तक पांच करोड़ छियत्तर लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। काम अभी भी पूरा होना बाकी है। हाट के हस्तशिल्पियों के आवंटन की दिशा में अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। मोटी धनराशि खर्च किए जाने के बाद भी इस परियोजना का लाभ हस्तशिल्पियों को नहीं मिल पा रहा है।
परियोजनाएं पूरी हों, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। लक्ष्मीताल की नई योजना तैयार कर ली गई है। जल्द ही अरबन हाट की आवंटन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। एरच बांध की जांच शासन स्तर पर है। जबकि, 500 बेड के अस्पताल का ज्यादातर काम हो चुका है। जल्द काम पूरा होने की संभावना है।
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- आंद्रा वामसी, जिलाधिकारी
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