शहर की सीमाओं के विस्तार के बाद भी सिटी बस अब तक नहीं चल पाई। सार्वजनिक परिवहन का प्रमुख साधन ऑटो ही बने हुए हैं। लेकिन, लोगों को झांसी में मेट्रो रेल चलाने का सपना दो साल से दिखाया जा रहा है। हालांकि, ये साकार कैसे होगा, इसकी योजना नहीं बताई गई है। साथ ही स्थानीय स्तर पर भी इसे लेकर किसी तरह की हलचल भी नजर नहीं आई। लखनऊ में बैठे लोग झांसी में मेट्रो रेल दौड़ा रहे हैं।
शहर की सड़कों पर आठ हजार से अधिक ऑटो दौड़ रहे हैं। स्थिति ये है कि ऑटो की रेलमपेल की वजह से सड़कें संकरी हो चली हैं। उस पर पार्किंग की व्यवस्था न होने की वजह से ये वाहन बेतरतीब तरीके से जहां-तहां खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। जबकि, सिटी बस संचालित करके इस समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है। लेकिन, इस दिशा में अब तक कोई प्रयास नहीं किए गए। बावजूद, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के बाद प्रदेश के अन्य शहरों की तरह यहां भी मेट्रो रेल चलाने की घोषणा की गई थी। सरकार की ओर से बाद में इसे कई बार दोहराया गया। खास बात यह है कि इसके लिए बजट में धनराशि भी जारी कर दी गई। वहीं, स्थानीय स्तर पर इसकी योजना तैयार करने की दिशा में भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।
इस चुनाव में विपक्षी दल इस मुद्दे पर भाजपा को घेर रहे हैं। भाजपा की ओर से भी विकास की इस योजना को ज्यादा तूल नहीं दिया जा रहा है। उनकी ओर से चुनाव में इसकी चर्चा भी नहीं हो रही है।
झांसी महानगर जरूर है, परंतु देश के अन्य महानगरों की तुलना में ये छोटा है। ऐसे में मेट्रो रेल के संचालन की बात यहां बेमानी ही लगती है। इसे लेकर सरकार की क्या योजना है, ये नहीं बताई गई। सिर्फ घोषणा ही सुनते आ रहे हैं।
- नीतेश त्रिपाठी, मेडिकल रिप्रजेंटेटिव
सार्वजनिक परिवहन की बेहतर व्यवस्था लोगों की बुनियादी जरूरतों में से एक है। मेट्रो ट्रेन संचालन की बात दूरगामी है। लेकिन, छोटे-छोटे प्रयासों से परिवहन व्यवस्था बेहतर की जा सकती है। लंबी दूरी के रूटों पर सिटी बस संचालित की जा सकती हैं।
- राजेंद्र खरे, एडवोकेट
शहर को अभी मेट्रो ट्रेन की जरूरत नहीं है, बल्कि आवश्यकता है अतिक्रमण मुक्त सड़कों की, पार्किंग की और यातायात नियंत्रित करने के उपायों की। इतना भर करने से शहर के लोगों का आवागमन सुगम बनाया जा सकता है। - दिलीप दासानी, कारोबारी
लोगों को सब्जबाग दिखाने में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को महारत हासिल है। लोगों से उनके खातों में पंद्रह लाख रुपये डालने का वादा किया गया था, जो अब तक पूरा नहीं किया गया। रोजगार की दिशा में किए गए वादे भी खोखले साबित हुए हैं। इसी तरह से भाजपा सरकार की ओर से मेट्रो रेल का शिगूफा छेड़ा गया, लेकिन इसका लेकर दो साल में कोई योजना नहीं बनाई गई। भाजपा आम जनता को झांसा देने का काम ही करती आई है।
- अरविंद वशिष्ठ, प्रदेश संगठन मंत्री - कांग्रेस
सपा की पिछली सरकार में महानगर के लोगों को बेहतर जन सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम किया गया था। इसके लिए पिछली सरकार द्वारा कई योजनाएं शुरू की गईं थीं, जिन्हें पूरा करने का काम वर्तमान सरकार को करना था। लेकिन, जन सुविधाओं का ध्यान न रखते हुए राजनीतिक विद्वेष चलते काम पूरा नहीं किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की मेट्रो रेल संचालन की घोषणा सफेद हाथी है, जो जुमलेबाजी के अलावा कहीं और नजर नहीं आएगी।
- राहुल सक्सेना, सपा नेता
कांग्रेस और सपा सरकारों में विकास उनकी पार्टी के नेताओं तक सीमित रहा। जबकि, भाजपा सरकार में विकास की रोशनी आम आदमी तक पहुंचाने का काम किया गया। चाहे वो उज्ज्वला योजना हो या सौभाग्य। मेट्रो रेल संचालन की घोषणा लोगों को बेहतर परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए की गई है। परियोजना बड़ी है, साकार होने में समय लगेगा। सरकारी स्तर पर योजना तैयार है। आने वाले दिनों में ये धरातल पर होगी।
- रानू देवलिया, जिला उपाध्यक्ष - भाजपा