अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल कॉलेज के कागजों में 24 बेड का प्राइवेट वार्ड चल रहा है लेकिन हकीकत में इसे हॉस्टल बना दिया गया है। यही वजह है कि इक्का-दुक्का मरीजों को छोड़ किसी को भी प्राइवेट वार्ड नहीं मिला है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि इस वार्ड का शुल्क लगने से लोग भर्ती होना पसंद नहीं करते।
कॉलेज के गेट नं. एक के पास प्राइवेट वार्ड बना है। इसे अघोषित तरीके से हॉस्टल बना दिया गया है जिसमें डॉक्टर रहते हैं। यदि कोई प्राइवेट वार्ड लेने के लिए प्रयास करता है तो उसे खाली नहीं होने की बात कहकर टरका दिया जाता है। साथ ही तर्क दिया जाता है कि प्राइवेट वार्ड में रोगी के भर्ती होने पर डॉक्टर व नर्सिंग स्टॉफ का मॉनीटरिंग करना संभव नहीं होगा। सीएमएस डॉ. सचिन माहुर का कहना है कि वार्ड खाली रहने की वजह से हॉस्टल बना दिया है।
लिफ्ट नहीं चलने से फूल रहीं सांसें : वार्ड की लिफ्ट टूटकर गिरने के बाद इसे बंद कर दिया गया है। गर्मी में रोगियों व तीमारदारों की आने-जाने में सांसें फूल रही हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि फिलहाल लिफ्ट को सही कराने का प्रयास किया जा रहा है। शासन को नई लिफ्ट का प्रस्ताव बनाकर भेजा है।