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मेडिकल कॉलेज से पासआउट जेआर और एसआर को महीनों बांट दी सैलरी

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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितता का एक बड़ा मामला सामने आया है। कॉलेज से पासआउट होने के बाद भी 30 जूनियर और सीनियर रेजिडेंटों को आठ महीनों तक मानदेय दिया गया। इस दौरान एक करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया। इस खेल का खुलासा होने पर प्राचार्य ने जांच कमेटी का गठन कर दिया है।
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इस वित्तीय अनियमितता का खुलासा प्राचार्य द्वारा बाबुओं के पटल बदलने के बाद हुआ। दूसरे बाबू ने इस वित्तीय अनियमितता को पकड़ा। पाया गया कि वर्ष 2016 से 2018 बैच के जूनियर डॉक्टरों को आठ महीने तक लगातार भुगतान किया गया। पासआउट कुछ सीनियर रेजिडेंटों को भी मानदेय दिया जाता रहा। सीनियर रेजिडेंट का मानदेय प्रतिमाह 80 हजार और जूनियर रेजिडेंट को करीब 70 हजार होता है। इस तरह एक करोड़ से अधिक रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई। यह मामला उजागर होने पर कालेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस मामले में कॉलेज के एक बाबू की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। कई और पर भी गाज गिरना तय है।
बाबुओं के पटल परिवर्तन के बाद मामला संज्ञान में आया तो जांच के लिए समिति का गठन कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। कुछ जेआर से भुगतान किए गए पैसे की रिकवरी हो गई है। बाकी से भी पैसा वसूल किया जाएगा। - डॉ. साधना कौशिक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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