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Jhansi News: कहां गईं बेटियां... पांच साल से 150 परिवार अपनों के लौटने की आस में

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हर साल करीब 300 किशोरी और युवतियां होती हैं लापता, 35-40 का नहीं चल पाता पता
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केस एक
बाजार गई बेटी नहीं लौटी, पिता ने दर्ज कराई प्राथमिकी
प्रेमनगर थाना क्षेत्र के आजाद नगर निवासी विकास कुमार की नाबालिग बेटी इसी साल 31 अगस्त को बाजार से सामान लेने गई थी, लेकिन घर नहीं लौटी। परिजनों ने कई जगह तलाश की, फिर भी उसका पता नहीं चला। इसके बाद पिता ने प्रेमनगर थाने में अपहरण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई।

केस दो

भंडारे में खाना खाने गई किशोरी लापता
प्रेमनगर थाना क्षेत्र के नराईपुरा मोहल्ले की एक महिला की नाबालिग बेटी इसी साल 20 अगस्त को घर से भंडारे में खाना खाने गई थी। कई घंटे तक उसके नहीं लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। कोई जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने थाने पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज कराई। किशोरी का अब तक पता नहीं चल सका है।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। किसी घर से बेटी लापता होती है तो परिवार की जिंदगी उसके लौटने के इंतजार में ठहर जाती है। थाने से लेकर अधिकारियों के दफ्तर तक चक्कर, रिश्तेदारों से पूछताछ और हर अनजान फोन पर उम्मीद... यही उनकी दिनचर्या बन जाती है। झांसी में करीब 150 परिवार पांच साल से अपनी लापता बेटियों और महिलाओं की तलाश पूरी होने की आस लगाए बैठे हैं।
कुछ मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद वर्षों बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस का दावा है कि कई मामले प्रेम संबंधों से जुड़े होते हैं, लेकिन परिजनों के लिए सवाल अब भी वही है- उनकी बेटियां आखिर कहां हैं?
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले में हर साल किशोरियों और युवतियों के लापता होने के 300 से अधिक मामले सामने आते हैं। इनमें से हर साल करीब 35 से 40 का पता नहीं चल पाता। आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच साल में 150 से अधिक किशोरियों और 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं का अब तक पता नहीं चल सका है।
पहले लापता होने के मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर भी शिकायतें सामने आती थीं। अब ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137 या 87 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाती है। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी लापता लोगों की तलाश में देरी को लेकर परिजन सवाल उठाते रहे हैं।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि कई बार संसाधनों की कमी बताकर उन्हें टाल दिया जाता है, तो कभी रिश्तेदारों के यहां तलाश करने की सलाह देकर वापस भेज दिया जाता है। कुछ मामलों में युवती के प्रेम संबंध होने की आशंका जताकर जांच आगे नहीं बढ़ने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल विशेष सत्यापन अभियान चलाया गया था। इसमें सामने आया कि कई युवतियां और किशोरियां अपने आप घर लौट आई थीं, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में उनकी बरामदगी दर्ज नहीं हुई थी। इसके बावजूद कई परिवार अब भी अपनी बेटियों की तलाश में अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उनके लिए इंतजार अब तक खत्म नहीं हुआ है।ऐ
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ऐसे मामलों में ये कदम उठाती है पुलिस
- लापता होने की सूचना मिलने पर प्राथमिकी दर्ज करना।
- सीसीटीएनएस के माध्यम से संबंधित जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराना।
- लापता किशोरी या युवती के पोस्टर तैयार कर सार्वजनिक स्थानों पर लगवाना।
- आसपास के थानों को पोस्टर और संबंधित जानकारी भेजना।


लापता किशोरी या युवती का पता चलने तक पुलिस मामले की जांच बंद नहीं करती। उनकी तलाश लगातार जारी रहती है। पुलिस टीमें दूसरे राज्यों में भी जाकर जानकारी जुटाती हैं। कई युवतियों को तलाश कर उनके परिजनों को सौंपा गया है। पुलिस की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं। - विकास कुमार, एसएसपी
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