महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच बार-बार हो रहे विवाद को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने कमान संभाल ली है। अब सीएमएस प्रतिदिन इमरजेंसी में चार घंटे बैठेंगे।
गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में आए दिन तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों में बवाल हो रहा है। मामूली कहासुनी के बाद मामला मारपीट में बदल जाता है। कई बार जूडा काम ठप कर हड़ताल कर चुके हैं। हड़ताल के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा जाती है। जालौन निवासी हरचरण कुछ दिन पूर्व छत से गिर गया था और कई दिनों से उसका इलाज प्राइवेट नर्सिंग होम में चल रहा था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण शुक्रवार को उसके परिजन उसे मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि जूनियर डॉक्टर ने उसे भर्ती होने के पहले ही कई गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने की बात कहते हुए भगा दिया। इस संबंध में जब सीएमएस डा. हरीशचंद्र आर्या से बात की गई, तो उन्होंने ऐसी किसी भी घटना से इन्कार किया। सीएमएस ने कहा कि अगर मरीज को भगाया गया, तो परिजनों को शिकायत करनी चाहिए थी। सीएमएस ने बताया कि अब वह खुद इमरजेंसी में चार घंटे बिताएंगे। वह रोजाना शाम सात से नौ और रात बारह से दो बजे तक इमरजेंसी में रहेंगे। उन्होंने बताया कि यही पीक समय होता है।
कई झगड़े इसी समय अंतराल के बीच हुए हैं। वहीं, सीएमएस ने काउंटर पर तैनात कर्मियों को निर्देश दिए हैं कि जैसे ही कोई मरीज आता है, उसका मर्ज पूछकर फौरन पर्चा बना संबंधित डॉक्टर के पास भेज दें। कई बार विवाद गलत चिकित्सक के पास चले जाने से हो जाते हैं।
जूडा भी गिरेबां में झांके
झांसी। पिछले दो महीने में जूडा और तीमारदारों के बीच विवाद बढ़े हैं। हर बार जूनियर डॉक्टर तीमारदारों पर दोष मढ़कर हड़ताल की धमकी देते हैं। क्या ऐसा संभव है कि हर मामले में तीमारदारों की ही गलती हो? तीमारदार मरीज को इलाज के लिए लाते हैं, न कि विवाद करने के लिए। अस्पताल प्रशासन के अधिकारी भी इस बात को कबूल करते हैं कि हर मामले में तीमारदारों की गलती नहीं होती है। जूडा द्वारा गलत व्यवहार करने पर विवाद बढ़ जाता है।