हाईकोर्ट ने जब डीजी चिकित्सा शिक्षा को किया तलब, तब हकीकत आई सामने
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. किंजल सिंह के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मयंक सिंह ने लिपिक रामयश को निलंबित कर दिया है। कोर्ट के आदेश से मेडिकल कॉलेज के अफसरों को अवगत न कराने और अदालत संबंधी कार्यों में लापरवाही बरतने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर में आउटसोर्स पर एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की सेवा गत वर्ष समाप्त कर दी गई थी। इसके खिलाफ उसने स्थानीय अदालत में न्याय के लिए गुहार लगाई। फरवरी 2024 में कोर्ट ने पीड़ित को मुआवजा देकर मामले को निस्तारित करने का आदेश दिया था। इसकी जानकारी लिपिक रामयश ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य तक को नहीं दी। करीब छह माह तक कॉलेज प्रशासन की तरफ से मामला खत्म नहीं हुआ तो पीड़ित हाईकोर्ट चला गया।
हाईकोर्ट ने इस मामले में चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. किंजल सिंह से शपथ पत्र मांगा है। इसके बाद महानिदेशक ने जब सारे दस्तावेज मंगाए, तब पूरा मामला खुलकर सामने आया है। सूत्र बताते हैं कि प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि प्राचार्य कार्यालय के लिपिक ने सांठगांठ कर मामले को न सिर्फ दबाया बल्कि अधिकारियों को भी गुमराह किया।
प्राचार्य डॉ. मयंक सिंह ने बताया कि लिपिक रामयश की वजह से पीड़ित का मामला समय पर निस्तारित नहीं हो सका। इसके चलते उसे निलंबित कर दिया गया है। जल्द ही कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि किसी और की संलिप्तता मिलेगी तो उस पर भी सख्त कार्रवाई होगी।