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मेडिकल कॉलेज में कैंसर रोगियों को इसी साल से मिलेगी सिंकाई की सुविधा

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मेडिकल कॉलेज झांसी। - फोटो : ???? ????
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मेडिकल कॉलेज में कैंसर रोगियों को इसी साल से मिलेगी सिंकाई की सुविधा
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में इसी साल से कैंसर रोगियों को सिंकाई की सुविधा मिलेगी। इसके लिए नई कोबाल्ट मशीन खरीदी जाएगी। रखे-रखे खराब हो चुकी पुरानी कोबाल्ट मशीन के सोर्स को नष्ट किया जाएगा। इसके लिए कॉलेज प्रशासन ने संबंधित संस्था को पत्र लिख दिया है।
मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2005 में कोबाल्ट मशीन आई थी। तब से अब तक सिर्फ 25-30 कैंसर मरीजों की ही सिंकाई की गई। रखे-रखे ये मशीन खराब हो गई। जबकि, कई संस्थानों में सन् 2005 से पहले से लगी कोबाल्ट मशीन से प्रतिदिन 40-50 मरीजों की सिंकाई होती है। अब कोबाल्ट मशीन के सोर्स की क्षमता कम हो जाने के कारण इसे नष्ट करने की तैयारी चल रही है।
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दरअसल, रेडियोएक्टिव किरणें होने की वजह से सोर्स काफी खतरनाक होता है। ऐसे में एटॉमिक एनर्जी रेगुलेट्री बोर्ड ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सुरक्षित तरीके से इसे नष्ट करने के निर्देश दिए थे। कॉलेज प्रशासन ने भी संबंधित संस्था को पत्र लिखकर नष्ट करने की मांग की है। कभी भी संस्था के अधिकारी आकर इसे ले जा सकते हैं।
वहीं, अप्रैल में नए वित्तीय वर्ष की शुरूआत होते ही नई कोबाल्ट मशीन खरीद का ऑर्डर निकाल दिया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीशचंद्र आर्या ने बताया कि इसी साल नई कोबाल्ट मशीन आएगी। कैंसर के मरीजों को मेडिकल कॉलेज में ही सिंकाई की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
अभी ग्वालियर, कानपुर जाते
मेडिकल कॉलेज में कैंसर रोगियों की सर्जरी और कीमोथेरेपी तो हो रही है लेकिन रेडिएशन (सिंकाई) की सुविधा नहीं है। सिंकाई की सुविधा नहीं होने की वजह से अभी कैंसर रोगी ग्वालियर, कानपुर, दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगर जाते हैं। आने-जाने में उनका काफी समय व पैसा बर्बाद होता है।
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तीन डॉक्टर, मेडिकल फिजिसिस्ट एक भी नहीं
झांसी मेडिकल कॉलेज में कैंसर विभाग में तीन डॉक्टर हैं लेकिन मेडिकल फिजिसिस्ट नहीं है। कोबाल्ट मशीन को मेडिकल फिजिसिस्ट चलता है। ऐसे में नई मशीन आने के बाद यदि मेडिकल फिजिसिस्ट की तैनाती नहीं होती है तो समस्या खड़ी हो जाएगी। इस मामले को गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत भी शासन स्तर पर उठा चुके हैं। उन्होंने यहां पर मेडिकल फिजिसिस्ट की जल्द तैनाती की मांग की है।
ये भी जानें
- कैंसर रोगी को 25 से 30 बार सिंकाई करानी पड़ती है।
- लीनेक मशीन से सिंकाई के कोर्स के एक से डेढ़ लाख लगते।
- कोबॉल्ट मशीन से सिंकाई का कोर्स 15 से 25 हजार में हो जाता।
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