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अब ‘बिचौलियों’ पर कसा जाएगा शिकंजा

Sat, 11 Jul 2015 11:42 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के फोरेंसिक साइंस विभाग की शिक्षिका से वेतन की रिकवरी के आदेश जारी होने के बाद अब ‘बिचौलियों’ पर भी शिकंजा कसा जाएगा। मामले की जांच में वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
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गौरतलब है कि बीयू की शिक्षिका का 2011 में रीडर के पद पर सिलेक्शन हुआ था। 2013 में शिक्षिका ने 2005 में हुई कार्य परिषद की एक बैठक में हुए निर्णय को आधार बनाते हुए योग्यता के आधार पर बढ़े वेतनमान की मांग की थी। सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक और ‘मलाईदार’ विभाग के कुछ लोगों ने मिलीभगत कर इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों को अंधेरे में रखकर फाइल को ओके करवा दिया। महज तीन दिन में 25,800 की जगह शिक्षिका को 35,000 ग्रेड पे पर वेतन भुगतान को हरी झंडी दिखा दी गई।


सूत्रों ने बताया कि कार्य परिषद से भी इसका अनुमोदन नहीं कराया गया। अभी तक सब कुछ सही चल रहा था लेकिन ठीक एक साल बाद दिसंबर 2014 में एक शिक्षक ने शिक्षिका के मामले का हवाला देते हुए बढ़े ग्रेड पर वेतन भुगतान की मांग कर दी। मामले ने तूल पकड़ा तो विभिन्न विभागों के आठ रीडर और सामने आ गए। सभी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रार्थनापत्र देते हुए बढ़ा वेतनमान देने की मांग की।
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विश्वस्त सूत्रों की मानें तो बीयू प्रशासन ने इस मामले में तीन उच्च अधिकारियों की गोपनीय कमेटी गठित की थी। कमेटी ने पूरे मामले की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट हाल ही में हुई कार्य परिषद की बैठक में प्रस्तुत की। रिपोर्ट में दूध का दूध, पानी का पानी सामने आ गया और शिक्षिका से बढ़े हुए वेतनमान के रिकवरी के आदेश जारी कर दिए गए। कार्य परिषद में हुए आदेश से साफ है कि शिक्षिका को नियम विपरीत  वेतनमान का भुगतान किया जा रहा था, इसलिए अब उन ‘बिचौलियों’ पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन शिकंजा कसने जा रहा है,


जिन्होंने अधिकारियों को अंधेरे में रखा। इसमें मलाईदार और प्रशासनिक विभाग के कुछ लोगों के नाम प्रकाश में आ गए हैं। विश्वविद्यालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि ‘बिचौलियों’ के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई होगी। शिक्षिका ने अगर मांग की थी तो विभागीय कर्मचारियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाए।
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