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बारिश में भी जगाई शिक्षा की अलख

Sat, 11 Jul 2015 11:40 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
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झांसी। जब हौसले बुलंद हों तो बारिश भी पथ से नहीं डिगा सकती। कुछ ऐसा ही नजारा शनिवार को हंसारी में चलाए जा रहे अमर उजाला के ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान के दौरान देखने को मिला। सुबह से हो रही बारिश के बीच अमर उजाला व बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा निकाली गई रैली में बच्चों व शिक्षकों ने बेटियों की शिक्षा के प्रति लोगों में अलख जगाई। इस दौरान घर-घर जाकर शिक्षा से वंचित सात बच्चों का ऑन स्पाट विद्यालय में प्रवेश दिलाया गया। 
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हंसारी प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुए अभियान में प्राथमिक विद्यालय हंसारी बालक, प्राथमिक विद्यालय हंसारी कन्या, कन्या जूनियर हाईस्कूल के बच्चे शिक्षा से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियों व प्रेरक नारों से लोगों को जागरूक कर रहे थे। वहीं नगर खंड शिक्षा राजकुमार विश्वकर्मा, एबीआरसी चौधरी धर्मेंद्र, शिक्षक राजेश कुमार गौड़, पंकज वर्मा, पुष्पा सिंह, सीमा चौहान, मनीषा देवी, अर्चना तिवारी, आराधना राठौर, प्रीति रिछारिया, विद्यालय प्रबंध समितियों के अध्यक्षों में अच्छे लाल, संगीता बरार, सदस्यों में अनीता, अंगूरी, शिवराम विश्वकर्मा, अमर सिंह, इंद्रा, शांति देवी, गीता, सुरेश ने नामांकन पखवाड़ा एवं प्रवेश उत्सव के तहत बुलावा टोलियां बनाकर अमर उजाला की टीम के साथ बारिश के बीच राय मुहल्ला, पाल मुहल्ला, बढ़ई मुहल्ला, हरिजन बस्ती, मातन मुहल्ला में भ्रमण कर अभिभावकों को बेटियों को शिक्षा दिलाने को संकल्पित कराया एवं शिक्षा के अधिकार क ी जानकारियां दी। इस दौरान अमर उजाला की टीम व बुलावा टोलियों ने मौके पर आउट आफ स्कूल चल रहे सात बच्चों का विद्यालय में प्रवेश कराया। प्रवेश पाने वाली बेटियों में कृष्णा, छवि, पलक, नैना हैं, तो बालकों में गौरव, गणेश व विवेक हैं।




बेटियों की शिक्षा में बाधा बन रहा घरेलू कामकाज
एक ओर जहां गरीबी बेटियों को शिक्षा से वंचित कर रही है, वहीं कई परिवार ऐसे हैं, जो घरेलू कामकाज के चलते उन्हें नियमित पढ़ाई से महरूम कर रहे हैं। अपने भाई को खाना खिलाने में मगन छह वर्षीय बेटी नीति की मां से जब यह सवाल किया गया कि उसे स्कूल क्यों नहीं भेजा, तो मां ने घरेलू कामकाज अधिक होना बताया। स्कूल न जाने वाली विशाखा ने बताया कि घरेलू काम उसकी पढ़ाई में आड़े आ रहा है। विशाखा की दादी के मुताबिक स्कूलों में शिक्षा जहां महंगी है, वहीं सरकारी स्कूलों में वजीफा भी नहीं मिलता है। इस दौरान शिक्षकों द्वारा उन्हें समझाने पर वह बेटियों को शिक्षित कराने पर तैयार हुईं।
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