एक साल का काम चार साल में नहीं हुआ पूरा
झांसी। मऊरानीपुर में रेलवे ट्रैक के ऊपर ओवरब्रिज का निर्माण चार साल पहले शुरू किया गया था। काम एक साल में पूरा होना था, परंतु अब तक निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम और रेलवे के बीच आपसी तालमेल के अभाव की वजह से ये स्थिति बनी हुई है।
27 सितंबर 2012 को झांसी आए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मऊरानीपुर में झांसी-खजुराहो मार्ग से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक के ऊपर ओवरब्रिज निर्माण की घोषणा की थी। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को सौंपी गई थी। जून 2015 में सेतु निगम ने काम शुरू किया था। 698.45 मीटर लंबे और साढ़े सात मीटर चौड़े इस पुल के निर्माण पर 22.64 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जानी थी। निर्माण पूरा होने की अवधि जून 2016 तय की गई थी। रेलवे ट्रैक के ऊपर का पुल का 62 मीटर का हिस्सा रेलवे को बनाना था। इस पर रेलवे की ओर से 7.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे।
सेतु निगम की ओर से अपने हिस्से का काम पहले पूरा कर लिया गया। इसके बाद रेलवे ने काम शुरू किया लेकिन रेलवे की ओर से पुल की ऊंचाई 65 सेंटीमीटर अधिक कर दी गई। इससे मामला अटक गया। इसके बाद पुन: नई डिजाइन तैयार कराई गई। इसके बाद सेतु निगम की ओर से बनाए गए स्लैब को उठाकर रेलवे के अनुरूप करने के लिए आईआईटी कानपुर से पद्धति प्राप्त की गई, जिसमें देरी लग गई। स्थिति ये है कि काम अब भी पूरा नहीं हो पाया है। इसके अलावा निर्माण में देरी की वजह से इसकी लागत भी बढ़ गई है। पहले जहां इसके निर्माण पर 22.64 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा था, वहीं अब 25.02 लाख रुपये की लागत से ये बनकर तैयार होगा।
ब्रिज निर्माण में देरी का सबसे ज्यादा खामियाजा मऊरानीपुर के स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। निर्माणाधीन ब्रिज के नीचे सड़क की हालत खस्ता है। वहां घड़ी-घड़ी जाम की स्थिति पैदा होती है। इसके अलावा झांसी-खजुराहो मार्ग का भी यातायात प्रभावित बना रहता है।
ब्रिज के स्लैब उठाने का काम शुरू कर दिया गया है। दो माह में ये पूरा हो जाएगा लेकिन ब्रिज का पूरा निर्माण तब भी पूरा होगा, जब शासन से बजट मिल जाएगा। शासन को रिवाइज्ड एस्टिमेट भेज दिया गया है। - आरके सिंह, उप परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम।
गड़बड़ी किस तरह पर हुई, इसकी जानकारी की जाएगी। प्राथमिकता ब्रिज का निर्माण जल्द पूरा करना है, ताकि लोगों का आवागमन सुगम हो। इस दिशा में रेलवे की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। - मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, रेलवे।