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चित्रों के जरिए दिया स्वच्छता का संदेश

Mon, 26 Nov 2018 01:36 AM IST
jhansi
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स्वच्छता का संदेश - फोटो : amarujala
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अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत रविवार को मोंठ में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बालिकाओं ने चित्रों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। इस दौरान विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। साथ कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की शपथ भी ली।
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मोंठ के टीकाराम महाविद्यालय में आयोजित प्रतियोगिता में विभिन्न शिक्षण संस्थानों की पचास  बालिकाओं ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने चित्रों में पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता को जरूरी बताया गया।
प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में पहला स्थान आकांक्षा गिरी, दूसरा ज्योति चतुर्वेदी, तीसरा दीपाली सोनी, चौथा मेघा दुबे और पांचवां स्थान अंशु कुमारी ने प्राप्त किया। जूनियर वर्ग की प्रतियोगिता में चांदनी पटेल पहले, सचिन गौतम दूसरे, साक्षी गौतम तीसरे, सार्थक अग्रवाल चौथे और साधिका अग्रवाल पांचवें स्थान पर रहीं। इसके अलावा रुद्र प्रताप सिंह, अर्णव प्रताप सिंह, सौम्या दुबे, भावना कुशवाहा और अभिषेक यादव के चित्रों को भी सराहा गया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डा. इंदल शास्त्री, प्रशांत खरे, डा. पिंकी सिंह, शशि अग्रवाल और मुक्ता पांडेय शामिल रहीं। सभी विजेता प्रतिभागियों को अतिथियों ने पुरस्कृत किया।
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इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि टीकाराम महाविद्यालय के चेयरमैन डा. अशोक यादव ने कहा कि संस्कृति, संस्कार और परंपराओं को नारी शक्ति ही जीवित रखे हुए है। समाज हो या देश, सभी की तरक्की में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
विशिष्ट अतिथि नगर पंचायत मोंठ के चेयरमैन अनिरुद्ध यादव ने कहा कि महिलाएं दो घरों का उजाला होती हैं।   शिक्षक डा. लोकेंद्र सिंह ने कहा कि महिलाएं शांत न रहें, बल्कि अपने या समाज में किसी के साथ भी होने वाले किसी भी तरह के गलत काम के प्रति आवाज उठाएं।
इस मौके पर उत्तर प्रदेश अधिवक्ता संघ की अनुशासन समिति के सदस्य साकेत गुप्ता, बार एसोसिएशन मोंठ के सचिव संजय बादल, ग्राम प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष रामबाबू राजपूत बसोवई, ग्राम प्रधान दतावली भगवतनारायण उपाध्याय, ग्राम प्रधान यशवंत सिंह राजपूत बरनाया, बृखभान सिंह पाल, मुकेश समाधिया, उमाशंकर वर्मा,, गजेंद्र राजपूत, धर्मेंद्र कुमार गौतम, राघवेंद्र राजपूत, राजेन्द्र सिंह कुशवाहा, रहीश यादव, राममोहन राजपूत, अनिरुद्ध कुमार दुबे, जगराम प्रजापति, राजेंद्र परिहार आदि मौजूद रहे।


तरक्की के लिए समानता जरूरी
देश की तरक्की के लिए महिलाओं और पुरुषों को कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा। अपराजिता के माध्यम से अमर उजाला ने महिला सशक्तिकरण की मुहिम चलाकर पुरुष और महिला के बीच के फर्क को दूर करने का काम किया है।
- डा. पिंकी सिंह, विभागाध्यक्ष - गृह विज्ञान

आवश्यक है नारी का सम्मान
जिस घर में नारी को सम्मान मिलता है, वहीं देवताओं का वास होता है। ये कहावत हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। लेकिन, पिछले कुछ सालों के दरम्यान ये सोच बदली है। इसी का नतीजा रहा कि समाज गर्त की ओर गया।
- शशि अग्रवाल, शिक्षिका

शिक्षा से ही उज्जवल भविष्य
देश और समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी है। इसके बगैर देश और समाज के उज्जवल भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसके लिए महिलाओं को ज्यादा आगे आना चाहिए।
- मुक्ता पांडेय

महिला की तरक्की से राष्ट्र की तरक्की
कोई भी संघर्ष बगैर महिलाओं के कामयाब नहीं हो सकता। स्त्री की उन्नति पर ही राष्ट्र, परिवार और समाज की उन्नति निर्भर है। महिलाएं खुद को मजबूत बनाएं और ये काम शिक्षा के जरिये बेहद आसानी से किया जा सकता है।
- सौम्या दुबे, प्रतिभागी

महिलाओं को मिले सम्मान
समाज के हर क्षेत्र में महिलाएं खुद को साबित कर चुकी हैं। चाहे रानी झांसी हों या कल्पना चावला, सभी क्षेत्रों में महिलाओं ने अपनी सफलता का परचम फहराया है। पुराने समय में देश में महिलाओं को विशेष सम्मान दिया जाता था, आज भी इसकी जरूरत है।
- आकांक्षा गिरि, प्रतिभागी


नारी के गुणों का सदुपयोग करे समाज
नारी अगरबत्ती के समान है, जो स्वयं को जलाकर समाज को सुगंधित करने का काम करती है। नारी जननी ही नहीं, जगत जननी है। नारी के गुणों का सदुपयोग कर समाज को उन्नति की ओर ले जाया जा सकता है।
- मेघा दुबे, प्रतिभागी

हर महिला को मिले सम्मान
देश और समाज को उज्ज्वल बनाने के लिये महिलाओं का सम्मान करना बहुत जरुरी है। महिलाओं को सम्मान मिले, तो विकास के नये आयाम अपने आप खुलते हैं। इसकी शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी चाहिए।
- दीपाली सोनी- प्रतिभागी

शिक्षित बनाकर करो महिलाओं का सम्मान
नारी का करो सम्मान, तभी होगा देश महान, ये महज नारा भर नहीं है, बल्कि हकीकत है। दुनिया के जितने भी विकसित देश हैं, उनमें हमेशा से ही महिलाओं को सम्मान मिलता आया है। महिलाओं को सच्चा सम्मान उन्हें शिक्षित बनाकर दिया जा सकता है।
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- चांदनी पटेल, प्रतिभागी
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