मार्च से पहले करोड़ों के वारे-न्यारे, पूछ रही जनता संकट कब दूर होंगे हमारे
झांसी। सांसद, विधायक, तमाम सरकारी विभाग। विकास के लिए खातों में करोड़ों का बजट और दहलीज पर खड़ी मार्च की क्लोजिंग। रविवार को अमर उजाला टीम की पड़ताल में शहर में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। कितने ही काम विकास की राह देख रहे हैं। साल भर सोती रही सरकारी मशीनरी अब बजट को ठिकाने लगाने के रास्ते ढूंढ रही है। धड़ाधड़ टेंडर की व्यवस्था हो रही है। शहरवासी इंतजार कर रहे हैं कि उनकी बड़ी समस्याओं का हल आखिर कब होगा।
सूट पहन कर लगाते झाड़ू खिंचवाते फोटो, कूड़े का समाधान नहीं
शहरवासी स्वच्छता के नाम पर सरकारी अमले के दिखावे से त्रस्त हैं। शहर में प्रमुख सड़कों से लेकर जगह-जगह कूड़ा बिखरा पड़ा है। घरों से कूड़ा उठाने की भी कोई कारगर व्यवस्था नहीं है। जो कूड़ा उठाया भी जाता है उसके निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। स्मार्ट सिटी का सब्जबाग दिखाकर इसे डंपिंग साइट ले जाकर गिरा दिया जाता है और रात के अंधेरे में आग लगा दी जाती है। इस जहरीले धुएं से शहरवासी बीमार पड़ रहे हैं। अभी तक कोई ठोस समाधान न नगर निगम के पास है न प्रशासन के पास। अफसर गाहे-बगाहे क्लीन झांसी, ग्रीन झांसी की बातें कर सूट पहने हुए झाड़ू पकड़कर फोटो जरूर खिंचवा लेते हैं।
सुरसा का मुंह बना केके पुरी नाला
केके पुरी नाला तीन साल से क्षेत्र में विकराल समस्या बना हुआ है। आस पास के दो किलोमीटर दायरे के लोगों को बारिश आने से पहले डर सताने लगा है। क्योंकि नाले का बहाव सही न होने की वजह से बारिश के दौरान उनके घरों का फर्नीचर, रसोई का सामान से लेकर वाहन तक नाले के पानी में तैरते हैं। आवास विकास केके पुरी, संगम विहार, सैय्यद नगर सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। जनप्रतिनिधयों से लेकर अधिकारी एक के बाद एक झूठे आश्वासन देते आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि कोई ठोस समाधान नहीं है तो सैय्यद नगर में पुलिया के नीचे लगे छह पाइप (साइफन) हटा कर पुलिया को ही ऊंचा करा दिया जाए। इससे काफी हद तक समाधान हो जाएगा।
नासूर बन गई है सीपरी बाजार ओवरब्रिज किनारे की सड़क
सीपरी बाजार के दुकानदार और वहां रहने वाले उलट प्रश्न करने लगे हैं कि उन्हें आखिर किस जुर्म की सजा मिल रही है। परेशानी झेलते हुए उन्हें छह वर्ष हो गए हैं। सड़क न बनने से वहां जाम लगा रहता है। दुकानदारी चौपट है। धूल उड़ने से लोग अस्थमा व अन्य बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
कहां कितना बजट पड़ा है
नगर निगम 118 करोड़
जिला पंचायत 165 करोड़ (मंडल में)
ग्राम पंचायत 167 करोड़ (मंडल में)
चारों विधायक भी विकास निधि का 10 से 42 फीसदी ही खर्च कर सके हैं। औसत खर्च 25 फीसदी के आस पास ही रहा
शहर की अन्य समस्या
- मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, गायत्री कॉलोनी, मास्टर कॉलोनी में पानी के लिए तरस रहे लोग। खरीद कर पीने को मजबूर।
- सीपरी बाजार, मसीहागंज, चमनगंज, नाथ की कोठी में रात दो-तीन बजे थोड़ी देर के लिए ही आता है पानी।
- नंदनपुरा पुलिया, सुभाषगंज चौराहे के पास, तालपुरा में नेहरू पार्क के पास दो तीन जगह, खंडेराव गेट के पास कूड़ा पड़ा रहता है।
- आईटीआई से गुरु हरिकिशन महाविद्यालय, दतिया गेट फिल्टर रोड, मेन दतिया गेट, सीपरी बाजार लहरगिर्द की पहाड़ी आदि क्षेत्र की सड़कें जर्जर हैं।
अब नगर निगम पर नहीं हैं 118 करोड़
‘नगर वासियों की समस्याओं पर हमारा पूरा ध्यान है। सीपरी क्षेत्र के लोगों को समस्या ओवरब्रिज की वजह से हो रही है। वहां ब्यूटीफिकेशन, एपेक्स का काम चल रहा है। ग्रेनाइट पत्थर की सीट लगाई जाएंगी। वहां से वेंडर्स को हटाया जाएगा। ओवरब्रिज के बराबर सड़क का काम जल्द शुरू होगा। प्रक्रिया चल रही है। मुबारक मार्केट क्षेत्र में नाला बनाने का काम शुरू हो गया है। केके पुरी नाले पर लोगों ने काफी अतिक्रमण कर लिया है। वहां जेसीबी ले जाना मुश्किल है। फिर भी कोई न कोई समाधान निकाला जाएगा। नगर निगम के पास अब 118 करोड़ का बजट नहीं है। 69 करोड़ के काम दो महीने पहले हुए हैं, 23 करोड़ का भुगतान होना है। 46 करोड़ के काम दो दिन पहले ही फाइनल हुए हैं। नगर में साफ-सफाई को लेकर भी गंभीरता से विचार हो रहा है ’
रामतीर्थ सिंघल, महापौर
बीमारों के लिए रोक कर रखी है विकास निधि
‘मैं विधायक निधि से बीमारों को इलाज के लिए बड़ी संख्या में पैसा देता हूं। इसलिए रोक कर रखता हूं, पता नहीं कब किसे जरूरत पड़ जाए। विधायक निधि मई से अगले वर्ष मई तक खर्च की जाती है। अप्रैल में ही लोगों से जुड़े विकास के कामों के टेंडर करा दूंगा। सड़क, बिजली के कई काम बुंदेलखंड विकास निधि से करा दिए हैं। सीपरी बाजार की सड़क के संबंध में तीन दिन पहले ही महापौर जी से बात हुई है। जल्द सड़क बनेगी। मुझे नगरवासियों का पूरा ख्याल है’
रवि शर्मा, विधायक
अफसर-विधायक झूठे, सांसद ने तो दर्शन ही नहीं दिए
‘सीपरी ओवरब्रिज के बराबर सड़क खस्ताहाल है। रोज बच्चे, बड़े गिरते हैं चोट लगती है। छह साल से अफसरों और विधायक के झूठे वादे सुनते आ रहे हैं। सांसद ने तो आज तक दर्शन ही नहीं दिए। अनशन किया, मुलाकात की फायदा क्या हुआ ’
देवेंद्र कुशवाहा, दुकानदार
‘दुकानदारी बची नहीं। धूल नए माल को पुराना कर देती है। हम लोगों को तो पता नहीं किस बात की सजा मिल रही है। दिन भर जाम लगा रहता है। अफसरों, विधायक, सांसद का क्या है आलीशान घरों में आराम फरमाते हैं। यहां धूल में रहकर देखें तब पता चले’
अशोक कुमार, दुकानदार
‘छह साल हो गए हम सीपरी के दुकानदारों की न तो अफसरों ने सुनी और न विधायक, महापौर ने। उम्मीद थी कि सांसद कुछ हस्तक्षेप करेंगे। शहर के हैं यहां का दुख-दर्द समझते हैं। लेकिन उन्होंने तो आज तक आकर हम लोगों का हाल भी नहीं जाना। बताइए हम क्या करें’
गुड्डू चौरसिया, दुकानदार
‘जी का जंजाल बन गया है केके पुरी नाला। महापौर, नगर आयुक्त, विधायक सब आए। आश्वासन दिए हुआ कुछ भी नहीं। सांसद तो खैर आज तक आए ही नहीं हैं। बारिश में डेढ़ से दो किलोमीटर का क्षेत्र में चार फुट तक नाले का पानी घरों में भर जाता है’
हेमंत साहू, वर्कशॉप संचालक
‘मेरा तो घर ही केके पुरी नाले की वजह से गिरने की कगार पर आ गया था। ठेकेदार से बहुत मिन्नत की, उसने उल्टा यह कह दिया जिससे शिकायत करनी है कर लो। मरता क्या न करता। पांच हजार रुपये घर के बराबर नाले की सफाई और 16 हजार टूटे नाले की मरम्मत में खर्च किए’
विकार अली, सैय्यद नगर
‘क्या अफसर, क्या नेता सब झूठे हैं। हाथ जोड़ कर सिर्फ वोट के लिए आते हैं। केके पुरी नाले के बारिश में ओवरफ्लो होने से दो महीने कई मोहल्लों का जीवन नरक हो जाता है। सैय्यद नगर पुलिया को ही तीन फुट उठाकर नीचे लगे साइफन हटा दें तो बहुत राहत मिल जाए’
अकरम खान, सैय्यद नगर