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Jhansi News: झांसी में मराठी, बंगाली, दक्षिणी समाज, जानिए कौन कैसे मनाने वाला है मकर संक्रांति

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संवाद न्यूज एजेंसी

कोछाभावर। मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इसमें मंदिरों में भव्य धार्मिक कार्यक्रम होंगे। लोग जलाशयों एवं नदियों में स्नान कर अपने आराध्य देव के दर्शन कर खिचड़ी, लडडू आदि का दान करेंगे। वहीं, घरों में त्योहार पर मन भावन पकवान बनाए जाएंगे। दक्षिण भारतीय परिवार स्वामी अयप्पा मंदिर में पूजा करेंगे। वही, बंगाली समाज कुलदेवता एवं देवी की पूजा कर भगवान कृष्ण को गोकुल पीठे का प्रसाद अर्पण करेंगे।





अयप्पा मंदिर में होगी विशेष पूजा



सीपरी पहाड़ी स्थित स्वामी अयप्पा मंदिर में मकर संक्रांति मनाई जाएगी। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे दक्षिण भारत के श्रद्धालु पूजा अराधना के लिए एकजुट होंगे। सचिव केवी कृष्ण कुमार ने बताया कि मंदिर में स्वामी अयप्पा, भगवान गणेश, मां दुर्गा, नागराज आदि देवताओं का अभिषेक शृंगार होगा। दोपहर में भंडारा एवं शाम को दीपदान तथा अन्य धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
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श्रद्धा भक्ति से मनाते हैं पौष पर्व




बंगाली समाज में मकर संक्रांति का त्योहार पौष पर्वन के नाम से मनाया जाता है। पर्व पर लगभग सभी व्यंजन चावल से बने होते हैं, जिनमें खजूर के गुड़ का उपयोग किया जाता है। बांधव समिति के रविशंकर चटर्जी के अनुसारस 14 को पौष पर्वन उत्साह एवं श्रद्धा से मनाया जाएगा।



तिल गुड़ खाइए, मीठे बोल बोलिए

महाराष्ट्र समाज में मकर संक्रांति पर्व श्रद्धा से मनाया जाता है। भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद मिट्टी के छोटे-छोटे बर्तनों जो पांच एवं 13 की संख्या में होते हैं, उनमें खिचड़ी, तिल के लडडू एवं मौसमी सब्जियां, कुमकुम, हल्दी रखकर सुहाग की सामग्री के साथ सुहागिन महिलाओं को दिया जाता है। समाज के पुरोहित गजानन खानवलकर के अनुसार यह सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पर्व पर बुजुर्ग अपने से छोटों को तिल गुड़ की बर्फी अथवा लडडू देते हैं और कहते हैं कि तिल गुड़ खाइए मीठे बोल बोलिए।
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11सीटीके02 : किला रोड बाजार के सामने बने सार्वजनिक शौचालय के बाहर लगी महिलाओं की लाइन।

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