झांसी। मकान अथवा इमारत का मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए जेडीए द्वारा जमीन की एनओसी के लिए तहसील में आवेदन को भेज दिया जाता है। दो महीने के भीतर लगभग 200 लोगों ने मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किया है। लेकिन तहसील से एनओसी जारी नहीं होने पर झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा मानचित्र को स्वीकृत नहीं किया जा रहा है। ऐसे में आवेदक जेडीए और तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
नियमानुसार शहरी क्षेत्र में मकान बनाने के लिए झांसी विकास प्राधिकरण से मानचित्र को स्वीकृत करना आवश्यक है। मानचित्र के आवेदन होते ही जेडीए द्वारा जमीन की सत्यता जानने के लिए तहसील को जमीन की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी करने के लिए भेजा जाता है। तहसील प्रबंधन द्वारा जमीन की रिपोर्ट लगने के बाद ही एनओसी जारी कर जेडीए को भेजे जाने का नियम तय किया गया था। जेडीए रिकार्ड के अनुसार दो महीने के भीतर जेडीए द्वारा लगभग 200 नक्शों की एनओसी जारी करने के लिए तहसील में भेजा जा चुका है। लेकिन तहसील प्रबंधन द्वारा अब तक एक भी एनओसी जारी कर जेडीए को नहीं भेजी गई है। जिसके चलते झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा मानचित्र को स्वीकृत नहीं किया जा रहा है। जिसका खामियाजा मानचित्र स्वीकृत करने वालों को भुगतना पड़ रहा है। आवेदन करने के बाद भी आवेदक तहसील और जेडीए के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
मानचित्रों की एनओसी जारी नहीं होने पर एसडीएम सदर को स्थिति से अवगत कराया गया है। जल्द ही सभी मानचित्रों की एनओसी जारी करने का आश्वासन दिया गया है।
सर्वेश कुमार दीक्षित, उपाध्यक्ष, जेडीए
तहसील द्वारा सिर्फ जमीन की ही एनओसी जारी की जाती है। कागजों में कमी होने पर एनओसी जारी नहीं की जा सकती है। कागजात पूरे होते ही तुरंत ही एनओसी जारी कर दी जाती है।
मदन मोहन गुप्ता, तहसीलदार