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झांसी: जिंदा जल कर एक ही परिवार के चार लोगों की मौत, पड़ोसियों की सूझबूझ से बची पांच की जान

Tue, 15 Oct 2019 08:58 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
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आग में झुलसा परिवार - फोटो : अमर उजाला
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झांसी के सीपरी बाजार क्षेत्र के लहर की माता मंदिर के पास दयाराम कॉलोनी स्थित एक मकान में सो रहे एक परिवार के चार सदस्यों की सोमवार की रात रहस्यमय हालातों में जलने से मौत हो गई। इस मामले में  अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। लूट में कामयाब न होने पर कमरे में सो रहे परिवार की चार सदस्यों को जलाकर मारने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में एसएसपी का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह हादसा लग रहा है। जांच जारी है।

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 सीपरी बाजार क्षेत्र के लहर की माता मंदिर के पास दयाराम कॉलोनी के शुरूआती दूसरे घर में रेलवे से सेवानिवृत्त जुगल किशोर उदैनिया अपने दो बेटों के साथ संयुक्त रूप से रहते हैं। घर के बगल में ही उनका एक खाली बाड़ा (प्लाट) पड़ा है। घर की नीचे की मंजिल में जगदीश उदैनिया, उनकी पत्नी रजनी, बेटी मुस्कान व मां कुमुद रहती हैं। बेटी मुस्कान बीकॉम प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। दूसरी मंजिल पर छोटे भाई दीपक उदैनिया, पत्नी मंजूषा, बेटी खुशी व बेटा कृष्णा के साथ रहते हैं। जगदीश घर पर ही ‘कुमुद किराना एवं प्रोवीजनल स्टोर’ के नाम से दुकान खोले थे, जबकि छोटे भाई दीपक एक ट्रेडिंग कंपनी का संचालन करते हैं। दीपक ने नीचे की मंजिल के एक कमरे में अपना गोदाम बना रखा है।  

सोमवार की रात करीब नौ बजे सभी ने एक साथ खाना खाया। इसके बाद दीपक अपने परिवार के साथ ऊपरी मंजिल पर बने अपने कमरे में चले गए। उनके जाने के बाद जगदीश ने प्रतिदिन की तरह छत पर लगे गेट की अंदर से कुंडी लगा दी। इसके बाद जगदीश, पत्नी, बेटी और मां के साथ एक कमरे और मंदिर वाले कमरे में पिता जुगल किशोर सो गए। रात करीब दो बजे दीपक को भाई के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। वह कमरे का गेट खोलकर छत पर आए। नीचे के हिस्से से धुआं और आग की लपटें उठती देख वह घबरा गए। छत पर लगे गेट की अंदर से कुंडी बंद होने के कारण वह नीचे नहीं उतर सके। इसके बाद उन्होंने शोर मचाकर पड़ोसियों को जगाया। इस बीच फ्रिज का कंप्रेशर फटने पर तेज आवाज हुई। शोर सुनकर बगल में रहने वाले डॉ. गोकुल प्रसाद जाग गए और घर से सीढ़ी उठाकर दीपक की मदद के लिए उनकी छत पर लगा दी।
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सीढ़ी की मदद से दीपक, उनकी पत्नी और बेटा- बेटी उतरकर नीचे आए। इस बीच अमृत लाल वर्मा, अजय वर्मा, कमलेश, जयसिंह राठौर समेत और भी पड़ोसी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने पानी डालकर आग को बुझाना शुरू किया। साथ ही कमरे के दरवाजे को किसी तरह धक्का मारकर तोड़ा। दरवाजे टूटने के बाद लोगों ने कमरे में पानी फेंकना शुरू किया। कुछ आग शांत होने पर लोगों ने अंदर जाकर देखा तो मां कुमुद पलंग व अन्य तीनों नीचे जमीन पर जली हालत में पड़े थे। चारों की मौत हो चुकी थी। जबकि, दूसरे कमरे में जुगल किशोर अचेत हालत में पड़े थे। उनको आनन- फानन में अस्पताल मेें पहुंचाया गया। करीब पौन घंटे बाद मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ी ने बाकी की आग को बुझाया।

खबर लगने पर सीपरी बाजार पुलिस मौके पर पहुंच गई। डीआईजी सुभाष सिंह बघेल, एसएसपी डा. ओमप्रकाश सिंह व अन्य अधीनस्थ अधिकारी ने भी मौके पर पहुंचकर स्थितियों का जायजा लिया। साथ ही परिजनों से बातचीत की। देर शाम सीपरी बाजार थाना पुलिस ने दीपक उदैनिया की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ आग लगाकर साजिशन हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया। तहरीर में बताया गया कि जगदीश और उनकी पत्नी सोसायटी (पत्ती) का संचालन करती थीं। महीने पर लोगों का पैसा जमा करते थे। वह दीपावली से पूर्व लोगों को पैसे बांटने थे। उनको 15 अक्तूबर को ही लोगों को पैसा वापस करना था। इसकी जानकारी काफी लोगों को थी। इसी रकम की लालच में बदमाश लूट के इरादे से उनके घर में दाखिल हुए। इसमें नाकामयाब होने पर उन्होंने उक्त घटना को अंजाम दिया।

डीआईजी के साथ वह भी मौके पर गए थे, तब तक हादसे के दूसरे कोई कारण सामने नहीं आए थे। प्रथम दृष्टया आग लगना ही हादसे का कारण सामने आ रहा है। परंतु इसके बाद साजिशन हत्या के आरोप लगने लगे। हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। हर परिस्थिति की जांच की जा रही है। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर भी काफी हद तक सब कुछ साफ हो जाएगा।
डॉ. ओमप्रकाश सिंह, एसएसपी।


शव रखकर किया प्रदर्शन
मंगलवार की शाम चारों शवों के घर पहुंचने पर क्षेत्र वासियों में मातम छा गया। कुछ देर में ही लोग शवों को लेकर अंतिम संस्कार के लिए रवाना हो गए। जर्मनी अस्पताल के तिराहे पर पहुंचने पर लोगों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। वह तुरंत रिपोर्ट दर्ज करने की मांग कर रहे थे। खबर लगने पर मौके पर पहुंचे सीपरी बाजार थाना प्रभारी निरीक्षक ने समझाया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। इसके बाद लोग अंतिम संस्कार के लिए आगे बढ़ गए।

खत्म हो गया हंसता - खेलता परिवार
 सीपरी बाजार के दयाराम कॉलोनी में हुए दर्दनाक वाकये ने एक परिवार की जिंदगी खत्म कर दी। जिसने भी परिवार के चार लोगों की एक साथ मौत की बात सुनी, उसका कलेजा कांप उठा। आसपास के लोगों को जगदीश के साथ घटी घटना पर यकीन ही नहीं हो रहा था।
दयाराम कॉलोनी में जगदीश पत्नी रजनी एवं पुत्री मुस्कान के साथ पुश्तैनी मकान की निजली मंजिल में रहते थे। जगदीश की मां कुमुद भी अकसर नीचे ही उनके साथ रहती थीं। पड़ोसियों के मुताबिक जगदीश स्वभाव से बेहद सरल थे। घर के खर्च के लिए आगे जनरल मर्चेंट की दुकान खोल रखी थी। उसी के जरिए कॉलोनी के लोगों से भी अपनेपन का रिश्ता हो गया था। रोजाना शाम उनकी दुकान पर मिलने-जुलने वालों का जमघट लगता। पड़ोस में रहने वाले पुनीत पांडेय के मुताबिक सोमवार रात करीब दस बजे तक वह जगदीश के साथ थे, उस दौरान कॉलोनी के लोगों के साथ चुहल भी कर रहे थे। इसके बाद सभी सोने चले गए।  रात करीब डेढ़ बजे हो-हल्ला होने पर लोग भागकर घटना स्थल पहुंचे लेकिन, तब तक वहां कुछ नहीं बचा। पड़ोसियों के मुताबिक जगदीश के घर से चंद कदम दूर अमृत लाल वर्मा के घर में रहने वाले रेलवे गॉर्ड ने रात करीब एक बजे सबसे पहले घर से धुआं उठते देखा। उसके शोर मचाने पर आसपास के लोग जुटने शुरू हुए। थोड़ी देर बाद पुलिस एवं फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौके पर पहुंच गईं। घटना स्थल पर दिन भर आसपास के लोगों की आवाजाही लगी रही। लोगों की जमा हो रही भीड़ को देखते हुए पुलिस ने आसपास बैरीकेडिंग भी लगा दी थी।   
 
सीए बनना चाहती थी मुस्कान
जगदीश की सिर्फ एक बेटी मुस्कान थी। मुस्कान को वह बेहद चाहते थे। मुस्कान ने इसी साल इंटरमीटिएट की परीक्षा पास करके बीकॉम में दाखिला लिया था। मुस्कान का ख्वाब बड़ी होकर सीए बनना था। पिता जगदीश की भी रजामंदी थी। वह उसे खूब पढ़ना-लिखाना चाहते थे। पड़ोसी बताते हैं, मुस्कान पढ़ने में काफी अच्छी थी, आसपास के बच्चों को पढ़ा भी देती थी। वहीं, पत्नी रजनी घर के साथ-साथ दुकान के कामकाज में हाथ बंटवाती थी। पड़ोसियों के मुताबिक जगदीश की जिंदगी छोटा परिवार, सुखी परिवार की लीक पर चल रही थी, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। पिता, बेटी और मां को एक साथ जिसने भी कफन से लिपटा देखा, उनका कलेजा दुख से फट गया। 

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