एरच थाना क्षेत्र के रामगंज मोहल्ला निवासी युवक रामजी को विदेशी ग्रुपों में बच्चों से संबंधित अश्लील वीडियो और फोटो बेचने का दोषी पाते हुए अदालत ने पांच साल के कारावास और डेढ़ लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कनिष्क सिंह की अदालत में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बताया कि 14 नवंबर 2021 को सीबीआई ने गाजियाबाद में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच में सामने आया था कि कुछ लोग देश-विदेश के विभिन्न ऑनलाइन समूहों में बच्चों से संबंधित अश्लील वीडियो और फोटो पैसे लेकर साझा कर रहे थे।
प्रतिबंधित सामग्री प्रसारित कर की थी 34.798 डॉलर की कमाई
मोबाइल नंबर के आधार पर सीबीआई ने एरच के रामगंज मोहल्ला निवासी रामजी की पहचान की। इसके बाद 16 नवंबर 2021 को उसके घर पर छापा मारकर दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। वहीं उसके भाई श्यामजी के पास से भी मोबाइल जब्त किया गया। जांच में रामजी के मोबाइल से पता चला कि वह 55 व्हाट्सएप ग्रुपों से जुड़ा हुआ था। इन ग्रुपों में विभिन्न नामों से बच्चों से संबंधित अश्लील वीडियो और फोटो साझा किए जा रहे थे। जांच एजेंसी को आठ जीमेल आईडी के जरिये विभिन्न पी-डिस्क अकाउंट भी मिले। आरोपी के लैपटॉप से भी कई आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए, जिन्हें उसने ‘चाइल्ड’ पासवर्ड से लॉक कर रखा था। जांच में 311 वीडियो अपलोड होना पाया गया।
सीबीआई के अनुसार आरोपी ने प्रतिबंधित सामग्री विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर करीब 34.798 डॉलर की कमाई की थी। यह राशि पी-डिस्क प्लेटफॉर्म के जरिये वीडियो साझा करने से अर्जित की गई थी। अदालत ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए पांच साल के कारावास और डेढ़ लाख रुपये जुर्माने की सजा
क्या है पी-डिस्क
पी-डिस्क एक क्लाउड स्टोरेज और वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म है। इसके जरिये लोग वीडियो और अन्य फाइलों को ऑनलाइन स्टोर, बैकअप और लिंक के माध्यम से साझा कर सकते हैं। बड़ी फाइलों को तेजी से साझा करने के कारण इसका उपयोग अधिक किया जाता है।
पॉक्सो और आईटी एक्ट में क्या सजा है?
बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री रखना, शेयर करना या बेचना भी अपराध
पांच साल से लेकर उम्रकैद तक का प्रावधान
भारी जुर्माना और डिजिटल उपकरण जब्त किए जा सकते हैं
अभिभावक ध्यान रखें
बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नजर रखें
अनजान लिंक और ग्रुप से बचाएं
पैरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल करें
संदिग्ध गतिविधि दिखे तो साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें