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खेलो इंडिया में मल्लखंभ शामिल

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खेलो इंडिया में मल्लखंभ शामिल
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झांसी। केंद्र सरकार ने देश के परंपरागत खेलों को प्रोत्साहन देना शुरू कर दिया है। खेलों इंडिया में मल्लखंभ को शामिल कर लिया गया है। अब इस खेल और खिलाड़ियों को सरकार से पूर्ण मदद मिल सकेगी। उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर प्राप्त होंगे।
महाराष्ट्र के नासिक, अमरावती, दादर, वाराणसी से सफर करता हुआ मल्लखंभ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फैला लेकिन सरकार से संरक्षण न मिलने पर यह क्रिकेट, जिमनास्ट, एथलेटिक्स, जूडो जैसे अन्य खेलों की तरह विशेष पहचान नहीं बना पाया। जबकि, मल्लखंभ के चाहने वाले लगातार इस खेल को जीवंत करने में जुटे रहे। मल्लखंभ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान देने के लिए हाल ही में गणेश मंदिर झांसी में हुए कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने पूरा सहयोग देने की बात कही थी। इसके बाद स्पष्ट हो गया था कि केंद्र सरकार द्वारा मल्लखंभ को लेकर कोई बड़ा कदम उठाया जाएगा। राष्ट्रीय मल्लखंभ फेडरेशन ऑफ इंडिया के टेक्निकल कमेटी के चेयरमैन अनिल पटेल के अनुसार खेलो इंडिया में मल्लखंभ शामिल होने से खिलाड़ियों को पूरा सहयोग सरकार से प्राप्त होगा। उत्तर प्रदेश मल्लखंभ एसोसिएशन के सचिव रवि प्रकाश परिहार ने बताया कि अभी तक यह खेल ओलंपिक से नहीं जुड़ा था। खेलों इंडिया में इसके शामिल होने से खिलाड़ियों को आर्थिक मदद भी मिलेगी।
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रस्सी व खंभे पर दिखाते करतब
मल्लखंभ भारत का एक पारंपरिक खेल है। इसमें खिलाड़ी लकड़ी के एक खंभे अथवा रस्सी पर तरह-तरह के करतब दिखाते हैं। कई रोमांचक आसन एकल व अन्य साथियों के साथ बनाते हैं। इनमें मयूरासन, पिरामिड आदि है। वर्तमान में यह खेल सिल्क एरियल के रूप में भी विकसित होता जा रहा है।
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प्रदेश में सबसे ज्यादा खिलाड़ी झांसी में
प्रदेश में मल्लखंभ के सबसे ज्यादा खिलाड़ी झांसी में हैं, जिनकी संख्या 65 से अधिक है, जो लक्ष्मी व्यायाम मंदिर, न्यू ईरा पब्लिक स्कूल, ब्लू बेल्स, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में अभ्यास करते हैं। झांसी में इस खेल का प्रचलन 17 वीं-18वीं सदी में मराठा शासन के साथ हुआ था। सन् 1933 में श्री लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में इस खेल को व्यापक बढ़ावा दिया गया। इसमें प्रशिक्षित कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़ी। इनमें अनिल पटेल, रवि प्रकाश परिहार, हरी शंकर कुशवाहा आदि हैं। शैलेश सहगल को मल्लखंभ में प्रदेश सरकार से लक्ष्मण पुरस्कार भी मिला।
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