रेलवे के पुराने कोचों में बनेंगे रेस्टोरेंट
जावेद असलम
झांसी। रेलवे अब अपने पुराने कोचों को बेचेगा नहीं, बल्कि इन्हें लीज पर देगा। इनमें रेस्टोरेंट खोले जाएंगे। रेलवे ने होटलों से प्रस्ताव मांगे हैं। खाका तैयार करने के बाद दिसंबर से रेलवे इस योजना को परवान चढ़ाएगा। कोच के आसपास गार्डन भी विकसित होगा, ताकि लोगों को ट्रेन में बैठे होने का भी अहसास हो सके। यह देश के बड़े स्टेशनों पर ही खोले जाएंगे।
रेलवे ने कंडम हो चुके ट्रेन के कोचों को रेस्टारेंट में तब्दील करने की योजना तैयारी की है। यह प्लेटफार्म के आसपास रखे जाएंगे, इससे यात्री के साथ स्टेशन पर आने वाले लोग इन कोचों में बैठकर लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठा सकेंगे। रेल कोच रेस्टोरेंट वातानुकूलित होंगे। कोच में लगी बर्थों को हटाने के साथ उनके स्थान पर सुंदर टेबिल और कुर्र्सियों को रेस्टोरेंट की तरह डाला जाएगा। रेस्टोरेंट को बनाने के लिए पुराने व कंडम होे चुके कोचाें का उपयोग किया जाएगा। रेलवे ने होटल संचालकों से प्रस्ताव भी मांगने शुरू कर दिए हैं। प्रस्ताव में आने वालेे सुझावों को शामिल किया जाएगा। इसमें पुराने कोच को नए रूप रंग ढालकर उसे आकर्षक बनाया जाएगा।
अखिल कुमार शुक्ला की
रेलवे बोर्ड की ओर से पुराने कोचों को रेस्टोरेंट के रूप में विकसित के लिए पत्र मिला है। जल्द ही इस दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया गया है। स्टेशन पर जल्द ही रेल रेस्टोरेंट की सौगात मिलेगी।
अखिल शुक्ला, मंडल वाणिज्य प्रबंधक
तीन साल के लिए लीज पर दिए जाएंगे रेस्टोरेंट
झांसी। ट्रेन के कंडम हो चुके कोचों को रेस्टोरेंट बनाने के लिए उनमें कई बेहतरीन व्यवस्थाएं की जाएंगी। रेस्टारेंट में रेल म्यूजियम, हेरीटेज पार्क, गैलरी के साथ बैठने से लेकर खाने पीने व बच्चों के लिए व्यवस्था होगी। कोच के आसपास गार्डन भी विकसित किया जाएगा। मंडल स्तर पर दिसंबर में टेंडर निकाले जाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। तीन साल के लिए यह रेस्टोरेंट लीज पर दिए जाएंगे।
ऐसा लगेगा जैसे ट्रेन चल रही है
रेस्टोरेंट में चलती ट्रेन जैसा अहसास होगा। इसके लिए रेस्टारेंट की खिड़कियों में स्क्रीन लगाई जाएंगी। इन पर ऐसा नजर आएगा जैसे ट्रेन चल रही हो और पेड़, मकान सहित अन्य चीजें पीछे छूट रही हों। रेल कोच रेस्टोरेंट का सारा स्टाफ रेलकर्मियों की ड्रेस में होगा। मैनेजर से लेकर टीटीई की ड्रेस और वेटर कुली के वेश में नजर आएंगे।
कोच की औसतन आयु 30 साल
स्लीपर व एसी कोच की आयु 30 साल होती है। इसके बाद यह कोच कंडम हो जाता है। साधारण कोच की कीमत 35 लाख, स्लीपर की 46 और एसी कोच की कीमत 70 लाख होती है। एक कोच के रखरखाव का कार्य 18 माह के भीतर होना जरूरी है। एक निरीक्षण व जांच के बाद एक कोच 3500 किलोेमीटर या फिर 96 घंटे ही चलाया जाता है।
अखिल कुमार शुक्ला की
रेलवे बोर्ड की ओर से पुराने कोचों को रेस्टोरेंट के रूप में विकसित के लिए पत्र मिला है। जल्द ही इस दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया गया है। स्टेशन पर जल्द ही रेल रेस्टोरेंट की सौगात मिलेगी।
अखिल शुक्ला, मंडल वाणिज्य प्रबंधक