घर से निकलने वाले सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग करने की चुनौती से निपटने के लिए नगर निगम ने एक नई योजना तैयार की है। तय किया है कि जो भी भवन स्वामी गीले कचरे से कंपोस्ट खाद बनाएगा उसे नगर निगम प्रोत्साहित करेगा। ऐसे गृहस्वामियों को हाउस टैक्स में छूट दी जाएगी। छूट कितनी होगी, इसका फैसला सदन की बैठक में होगा। इसके दो फायदे होंगे। कचरे का घर में ही इस्तेमाल होगा। शहर में गंदगी भी नहीं होगी।
महानगर के अधिकांश घरों में लॉन हैं। जिनके मकानों में जगह की कमी है, वह कई तरह के गमले लगाए हैं। इन गमलों में गृहस्वामी मौसम के अनुरूप फूल, घृत कुमारी, तुलसी के पौधे समेत अन्य प्रकार के पौधे लगाते हैं। पौधे हरे-भरे रहें, इसके लिए वह बाजार से रासायनिक खाद खरीदते हैं। भले ही वह कम मात्रा में खाद का इस्तेमाल करते हों, पर ओवरआल देखें तो भारी मात्रा में रासायनिक खाद का उपयोग होता है।
नगर निगम सूखा और गीला कचरा अलग-अलग करने पर जोर दे रहा है। गीला कचरा से कंपोस्ट खाद बनाया जा सकता है, बशर्ते गृहस्वामी उसे अलग करें और कंपोस्ट खाद बनाने वाली डस्टबिन में डालें। इससे खाद बनाएं। कंपोस्ट खाद के प्रयोग से न केवल रासायनिक खाद के इस्तेमाल पर रोक लग जाएगी, बल्कि यह लाभदायक भी साबित होगी। इसलिए नगर निगम ने तय किया है कि ज्यादा से ज्यादा गृहस्वामी कंपोस्ट खाद का इस्तेमाल करें।
कंपोस्ट खाद बनाने में गृहस्वामियों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, बल्कि डस्टबिन की तरह ही एक मशीन आएगी। चार से पांच हजार रुपये की इस मशीन में तीन कंपोनेंट होंगे, जिसमें गीले कचरे को भर दिया जाएगा। कचरा गल जाने के बाद उससे निकलने वाला पानी नीचे की तरफ इकट्ठा हो जाएगा और खाद अलग डिब्बे में इकट्ठा हो जाएगी। मशीन स्वत: आक्सीजन लेगी और पोषक तत्वों से भरपूर खाद तैयार करेगी। घर-घर में कंपोस्ट खाद बनाने का काम शुरू हो, इसके लिए 15 से 20 लीटर क्षमता के कंपोस्ट खाद पिट (डस्टबिन) सभी घरों में लगाना अनिवार्य किया जाएगा।
एक लाख से अधिक गृहस्वामी
नगर निगम में एक लाख से अधिक गृहस्वामी हैं, जिनसे सालाना 15 करोड़ रुपये की आय होती है। यदि सभी घरों में कंपोस्ट खाद पिट (डस्टबिन) लग जाएगा तो गीला कचरा बेकार फेंकने की समस्या समाप्त हो जाएगी।
नगर निगम सदन की बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा कि प्रत्येक घर में सूखा और गीला कचरा अलग- अलग किया जाए। गीला कचरा से कंपोस्ट खाद बनाया जाए। इसके लिए हाउस टैक्स देने में छूट दी जाएगी। छूट कितनी होगी, इसका निर्धारण सदन तय करेगा।
- प्रताप सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त