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महायोजना से बदलेगी विकास से अछूते 62 गांवों की तस्वीर

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झांसी। महानगर में शामिल होने के सात साल बाद भी विकास से अछूते 62 गांवों की तस्वीर बदलेगी। इसके लिए विकास प्राधिकरण और नियोजन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। दस साल के लिए बन रही महायोजना के आधार पर गांवों में जमीनों का चिन्हांकन करने के बाद विकास कार्य कराए जाएंगे। महायोजना के लिए सेटेलाइट मैपिंग का काम पूरा कर लिया गया है। अब हैदराबाद से बेस मैप मिलने के बाद नए साल में महायोजना के मुताबिक काम शुरू हो जाएगा।
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महानगर में साल 2001 में साल 2021 तक के लिए महायोजना तैयार की गई थी, जिसके आधार पर विकास कार्य कराए गए। इसके बाद आबादी बढ़ने के साथ दायरा बढ़ा, तो साल 2013 में महानगर की सीमा में 62 गांवों को शामिल किया गया। लेकिन इन गांवों में आज तक कोई विकास कार्य हो नहीं सका। अब इन गांवों में विकास कार्यों के लिए पहल शुरू हो रही है। सरकार की ओर से गांवों और महानगर के विकास के लिए साल 2031 तक की महायोजना तैयार कराई जा रही है। महानगर सीमा क्षेत्र की सेटेलाइट मैपिंग का काम हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर द्वारा किया गया। सामने आया कि मौजूदा समय में महानगर सीमा में करीब 1.50 लाख इमारतें हैं। नगर और ग्राम नियोजन विभाग ने सेटेलाइट मैपिंग के आधार पर सत्यापन का काम पूरा कर लिया है। सत्यापन रिपोर्ट को हैदराबाद भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक जनवरी 2021 तक महायोजना बनकर तैयार हो जाएगी। साथ ही दिसंबर अंत तक बेसमैप भी मिल जाएंगे। इसके बाद महानगर के बढ़े हुए और पिछडे़ क्षेत्रों में विकास को लेकर योजना तय की जाएगी।
भविष्य में जमीनों के उपयोग पर फोकस
महायोजना की सेटेलाइट मैपिंग में आवासीय, व्यावसायिक, सामुदायिक, संस्थागत, औद्योगिक क्षेत्र और ग्रीन बेल्ट की जमीनों को चिह्नित किया गया है। इसके आधार पर भविष्य में नागरिक सुविधाओं के लिए जमीनों का उपयोग किया जाएगा। इसी आधार पर ही नगर निगम और विकास प्राधिकरण काम कराएंगे।
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अब 10 साल के लिए महायोजना
महानगर सीमा क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए इस बार 10 साल के लिए महायोजना बनाई जा रही है। पहले यह 20 साल के लिए बनाई जाती थी। पहले महायोजना बनाने का काम जुलाई 2020 तक पूरा होना था, लेकिन कोरोना काल में देरी हो गई।
इन गांवों में हाेंगे विकास कार्य
बरुआसागर क्षेत्र के लक्ष्मनपुरा, वनगुवां, फु टेरा बरुआसागर, हरपुरा, ताल रमन्ना, घुघुवा, चिपलौटा, नोंटक्षीर, कोलवा, बरेठी, दानीपुरा, बड़ागांव क्षेत्र के दौन, बचावली खुर्द, बचावली बुजुर्ग, दुनारा, सुजाटा, भूपनगर, बड़ागांव, तौरबराटा, मथनपुरा, रमपुरा, मड़ोरा, बराटा, पारीछा, रिछौरा, गढ़मऊ, पठेश्वर, आरी, रूंदकरारी, रौनीजा, बेहटा, भरारी, कलोथरा, सारमऊ, सिमरा, गेवरा, लकारा, अंबाबाय, चंद्रा, रक्सा क्षेत्र के कोटखेरा, रक्सा, डगरवाहा, पठारी, पुनावली कलां, डोमागोर, ढिकौली, डोंगरी, गुढ़ा, रमपुरा, मठ, बाजना, किल्चवारा खुर्द, बमेर, राजापुर, गागौनी, बरुआपुरा, मुरारी, चमरुआ, किल्चवारा बुजुर्ग, बैदोरा, खजराहा खुर्द, खजराहा बुजुर्ग।
अब तक बीस साल के लिए नई महायोजना तैयार की जाती थी। इस बार महायोजना 10 साल के लिए होगी। महानगर की सेटेलाइट मैपिंग हो गई है, जिसके आधार पर सत्यापन कर लिया गया है। हैदराबाद से बेसमैप आने का इंतजार है। नए साल में महायोजना-2031 पूरी कर ली जाएगी। इसके आधार पर पिछड़े और असुनियोजित क्षेत्र में विकास की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
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एनके पुष्कर्णा, सह आयुक्त नियोजन, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग
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