अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। महाशिवरात्रि को लेकर मंगलवार को धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए। श्री नरसिंह मंदिर में भगवान भोलेनाथ और मां अन्नपूर्णा मंदिर में हल्दी और मेहंदी का कार्यक्रम हुआ। महिलाओं ने भगवान शिव को हल्दी और मेहंदी अर्पण कर एक दूसरे को लगाने के साथ ही भजन-कीर्तन किया। बुधवार को मंदिर प्रांगण में विवाह की रस्म अदायगी होगी।
पं. प्रमोद लिटौरिया ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है। शिवजी का जलाभिषेक अथवा रुद्राभिषेक करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। मंगलवार शाम मंदिर प्रांगण में हल्दी और मेहंदी की रस्म के बाद महिलाओं ने संगीत कार्यक्रम में भजन-कीर्तन किया। इस मौके पर संगीता गोस्वामी, पूजा तिवारी, शक्ति पाठक, संगीता तिवारी, ममता निगम, मधु तिवारी, सरोज श्रीवास्तव, मीना यादव, रेनू शर्मा, लक्ष्मी रश्मि, सोनी राठौर, कल्पना, प्रार्थना सोनी, श्रद्धा आदि मौजूद रहीं।
इधर, सुबोध गोस्वामी ने बताया कि बुधवार को डोडाघाट स्थित हनुमान जी मंदिर से शिव बरात प्रारंभ होकर नरसिंह मंदिर पहुंचेगी, जहां जय माल डालकर भगवान शिव-मां पार्वती का वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न होगा। इस दौरान रामकिंकर पटेरिया, छक्की लाल साहू, भरत पुरोहित, हरनाम सिंह तोमर, प्रोफेसर जगबीर सिंह, पंडित प्रमोद लिटौरिया, रमेश कुमार सिंह, राज बहादुर खरे, दिवाकर शर्मा, राजू यादव, रमेश नगाइच आदि मौजूद रहे।
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श्रद्धलुओं ने किया रुद्राभिषेक
ललितपुर। श्री नरसिंह मंदिर में भोलेनाथ का रुद्राभिषेक कर सर्वमंगल की कामना की गई। आचार्य प्रमोद लिटौरिया ने मंत्रोच्चारण कर भगवान शिव का दूध, दही, पंचामृत, घी, शहद आदि से अभिषेक कराया। भक्तों ने भोलेनाथ का पूजन कर अबीर, गुलाल, फूल, बेलपत्र आदि चढ़ाने के बाद आरती कर आशीर्वाद लिया। गुनसागर श्रीवास्तव, सुनील सोनी, अभिषेक सोनी, पं. अमित मालवीय, सीमा यादव, साक्षी विदुआ, शिवानी सोनी आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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मंगलगीत गाकर भोलेनाथ को हल्दी चढ़ाई
ललितपुर। चौबयाना हरदौल स्थित राजराजेश्वर महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को भगवान शिव को हल्दी चढ़ाई गई। महिलाओं ने बुंदेली गीतों के साथ शिव विवाह महोत्सव की खुशियां मनाईं। बुधवार को माता पार्वती और बाबा भोलेनाथ के वैवाहिक कार्यक्रम होंगे। पुजारी संजय ताम्रकार ने बताया कि भक्तों को दर्शन कराने की पूरी तैयारी है। ब्यूरो
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राधाकृष्ण साहू समाज मंदिर पर अखंड रामायण पाठ शुरू
ललितपुर। गांधी नगर नई बस्ती स्थित राधाकृष्ण साहू समाज मंदिर पर महाशिवरात्रि पर धार्मिक आयोजन होंगे। मंगलवार को अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ रामप्रसाद राजपूत ने किया। इस दौरान पं. शिवम चौबे, पं राहुल चौबे, पं. सत्यम चौबे, पं. प्रवीण दुबे महाराज, पं. विष्णु मिश्रा, पं. प्रमोद चौबे, राजेश दीक्षित, रामप्रसाद राजपूत, भानु प्रताप लोधी आदि मौजूद रहे। मंदिर में वर्षों से आरती करने वाले 12 सदस्यों को श्री रामचंद की बाल मूर्ति स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की जाएगी। ब्यूरो
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पाली में निकलेगी शिव बरात
पाली। श्री हजरिया महादेव मंदिर से बुधवार दोपहर 12 बजे शिव बरात निकलेगी। ब्रह्मा, विष्णु, नारद के स्वरूप शामिल होंगे। बरात मुख्य बाजार, बस स्टैंड, रेंज चौकी, गांधी चौक, नंदवानी बगीचा होती हुई नीलकंठ मंदिर पहुंचेगी। वहां भगवान शिव के स्वरूप अपने नृत्य का प्रदर्शन करेंगे। महाआरती के साथ बरात का समापन होगा। वहीं, नीलकंठेश्वर धाम पर जलाभिषेक के बाद समिति की ओर से भंडारा किया जाएगा। संवाद
झूमरनाथ धाम पर लगेगा मेला
पुलवारा। ब्लॉक तालबेहट के रजपुरा के निकट सिद्ध क्षेत्र झूमरनाथ धाम में भगवान शिव पिंडी रूप में गुफा के अंदर विराजमान हैं। मान्यता है कि यहां आने वाले लोगों की मनोकामनाएं भगवान शंकर पूरी करते हैं।
कथा है कि 17 वीं शताब्दी में रजपुरा एवं आसपास के लोगों को भगवान शिव ने एक ही रात में स्वप्न दिखाया था कि रजपुरा एवं बठवाहा की पहाड़ी पर स्थित गुफा में एक शिवलिंग विराजमान है। गांव के लोग उक्त स्थान पर गए। देखा तो वहां भगवान शिव पिंडी के रूप में विराजमान थे। स्वप्न में यह भी कहा गया कि मेरी पूजा रजपुरा गांव के पाठक परिवार के लोग करेंगे। तब से अब तक भगवान शिव की पूजा-अर्चना पाठक परिवार के अलावा अन्य कोई नहीं करता।
चार दशक पहले तक श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए लंबे डंडे का सहारा लेते थे, क्योंकि गुफा का आकार छोटा होने के कारण लोग पिंडी रूपी भगवान भोलेनाथ के समीप नहीं पहुंच पाते थे। इसलिए डंडे में लोटे को बांधकर जलाभिषेक किया जाता था। धीरे-धीरे प्राचीन गुफा एवं उसमें विराजमान भगवान शिव की छोटी सी पिंडी का आकार बढ़ता गया और लोग लेटकर गुफा के अंदर भगवान शिव के समीप पहुंचने लगे। अब इसका आकार 5 फीट के आसपास हो गया है। वर्तमान में लोग आराम से पिंडी के रूप में विराजमान भगवान आशुतोष का समीप से दर्शन एवं जलाभिषेक करते हैं। यहां महाशिवरात्रि पर धूमधाम से भगवान का विवाह होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
झूमर नाथ मंदिर की विशेषताएं :
भगवान शिव को अर्धनारीश्वर भी कहा जाता है। भगवान शिव की आधी परिक्रमा ही लगाई जाती है। झूमरनाथ मंदिर में भगवान शिव की परिक्रमा लगाने के लिए गुफा के नीचे प्राकृतिक रूप से आधी जगह ही है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसी तरह मंदिर के ऊपर कलश शुभ माना जाता है। यहां प्राकृतिक शिवलिंग गुफा के ऊपर भी कलश नुमा पत्थर स्थापित है, जो अपने आप में अद्भुत है।