नौकरानी ने कहा कि बच्चे के पेट में दर्द होता है। इसलिए वह दूध में मिलाकर दवा दे देती थी, इससे उसे आराम मिल जाता था। इस पर शिक्षिका के होश उड़ गए। उसने दवा के बारे में पूछा। नौकरानी ने उन्हें भांग की गोली दी। शिक्षिका ने पास के डॉक्टर के पास जाकर वो दवा दिखाई। तब पता चला कि नौकरानी उनके बच्चे को भांग की गोली खिला रही थी। फिर शिक्षिका ने नौकरानी को काम से हटा दिया।
वहीं, मनोचिकित्सक डॉ. अमन किशोर ने बताया कि भांग खाने वाला भविष्य में पागलपन व डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। आत्महत्या की प्रवृत्ति जागृत होने के अलावा व्यक्ति छोटी सी बात पर आवेश में आकर दूसरों की भी जान ले सकता है। इन दिनों युवाओं में भी भांग का सेवन करने के मामले काफी बढ़े हैं। ऐसे में परिजनों को भी निगरानी रखने की जरूरत है।
नौकरानी बोली- मुझे तो मेरी मां खिलाती थी
मामले का खुलासा होने के बाद शिक्षिका नौकरानी को मनोरोगी समझकर जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंची। डॉक्टर को नौकरानी ने बताया कि पेट में दर्द होने पर वह रोती थी तो उसकी मां भांग की गोली खिला देती थी। इससे उसे आराम मिल जाता था। इसलिए जब शिक्षिका का बच्चा रोता था तो उसे लगता था कि पेट में दर्द हो रहा होगा। इसलिए वह गोली खिला देती थी।
नौकर ने लगा दी किशोर को भांग की लत
सिविल लाइन में रहने वाले किशोर को उसके घर के नौकर ने भांग की लत लगा दी। दरअसल, नौकर खुद भी भांग का सेवन करता था। किशोर उससे सिगरेट, मसाला मंगवाता रहता था। फिर नौकर ने कहा कि इससे ज्यादा अच्छा नशा तो भाग में होता है। पहले उसने पान में भांग मिलाकर खिलानी शुरू की। फिर किशोर इसका इस कदर आदी हो गया कि दिनभर में 30 से 35 भांग की गोलियां खाने लगा। वह बेहोश सा रहने लगा, तब परिजन इलाज कराने मनोचिकित्सक के पास पहुंचे।
शिक्षिका के छोटे बच्चे से लेकर नौकर द्वारा किशोर को भांग का आदी बनाने के मामले आ चुके हैं। ऐसे में लोगों को बच्चों को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। इन दिनों भांग का सेवन युवाओं में भी खूब बढ़ गया है। ओपीडी में हर महीने 100 से 120 मरीज मुनक्का यानी भांग का नशा करने वाले इलाज कराने आ रहे हैं। कई लोग बच्चे के पेट में दर्द होने पर भी भांग खिलाते हैं। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल।