संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। प्लेटफार्म की उपलब्धता न होने की वजह से लखनऊ की ओर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को रविवार 8 जून से 9 जुलाई तक निरस्त कर दिया है। ट्रेन के एक महीने के निरस्त होने से दैनिक यात्रियों और गोरखपुर की ओर जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं।
लखनऊ-प्रयागराज वंदे भारत के कोचों की संख्या बढ़ जाने के कारण झांसी-लखनऊ पैसेंजर को 30 दिन के लिए रद्द किया गया है। वंदे भारत के रैक बढ़ जाने से पैसेंजर ट्रेन को लखनऊ में प्लेटफाॅर्म उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। इस कारण रेलवे ने यह निर्णय लिया है। ट्रेन में किराया कम लगता है तो वहीं झांसी से लखनऊ तक जाने के वैकल्पिक साधनों में कई गुना रुपये खर्च करने होते हैं। इससे, दैनिक यात्री ड्यूटी जाने वाले और व्यापारी वर्ग के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। यात्रियों की मांग है कि इस ट्रेन को कानपुर तक संचालित किया जाए। वहीं पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि ट्रेन के निरस्तीकरण का आदेश एक हफ्ते पहले जारी कर दिया गया था।
छह महीने में 85 दिन निरस्त रही ट्रेन
यह ट्रेन 10 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के कारण निरस्त की गई थी। इसके बाद, गंगा पुल पर निर्माण के चलते 20 मार्च से 29 अप्रैल और अब 8 जून से 9 जुलाई तक यह ट्रेन निरस्त हुई है। यानी कि करीब 185 दिन में 85 दिन यह ट्रेन निरस्त रही है।
पैसेंजर ट्रेन से कानपुर जाने में आसानी होती थी। इसके रद होने के बाद से समस्या बढ़ गई है। इस ट्रेन को रद्द करने के बजाय संचालन कानपुर तक करना चाहिए। - साधना मिश्रा
इस ट्रेन का कालपी तक अप-डाउन करने के लिए एमएसटी बना रखी थी पर अब बस में ज्यादा किराया लगने के साथ ही समय की भी बर्बादी होगी। - भरत शर्मा