जिला अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में औसतन दो केस आ रहे
मनोचिकित्सक की राय- परिजन भी रखें निगरानी, कराएं काउंसलिंग
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ऑनलाइन गेमिंग की लत बेहद खतरनाक है। झांसी में तमाम लोग इस लत का शिकार होकर बर्बाद हो चुके हैं। कई लोग अपनी जीवनभर की पूंजी भी लुटा बैठे हैं। मनोचिकित्सकों का मानना है कि गेमिंग की लत किसी नशे से कम नहीं होती है। यह खतरनाक बीमारी का रूप ले लेती है। ऐसे लोगों की समय रहते काउंसलिंग करानी चाहिए।
वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. शिफाका जाफरीन ने बताया ऑनलाइन गेम का नशा युवा ही नहीं प्रौढ़ों के भी सिर चढ़कर बोल रहा है। उन्होंने बताया लोगों को समझना होगा कि ऑनलाइन प्लेटफार्म पर घर बैठकर कमाई अथवा गेम के माध्यम से मोटी कमाई करने के आकर्षक विज्ञापनों से बचना होगा। इस समय ऑनलाइन गेम में तेजी से लोग फंसते जा रहे हैं, औसतन रोजाना दो केस आ रहे हैं। इसलिए घरवालों को भी नजर रखनी होगी। जो गेम खेल रहे हैं, उनकी काउंसलिंग तुरंत करवाएं। डॉ. जाफरीन ने बताया कि गेम की लत लगने से जुनूनी-बाध्यकारी विकार ( ऑब्सेसिव-कंपलसिव डिसऑर्डर) की स्थिति पैदा हो जाती है। ये लोग चिंता कम करने के लिए बार-बार वही काम करते हैं, जो उनको पसंद होता है। यदि कोई अवरोध आता है, तो सब कुछ दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटते हैं।
0- इन बातों का ध्यान रखना जरूरी
1. ऑन लाइन गेम के आकर्षक प्रचार-प्रसार को नजरअंदाज करें। फ्री में मिलने वाले कूपन, स्टार व प्वाइंटों पर ध्यान नहीं दें। यह सब लालच देकर अपने जाल में फंसाने का तरीका है।
2. यदि युवा रुचि के साथ फोन पर घंटों बिता रहे हैं, तो करें चेक। यदि उसको जेब खर्च के लिए रुपये दिए हैं, तो उसका हिसाब जरूर लें चाहे दो रुपये क्यों न हो।
3. ऑनलाइन गेम का चस्पा लग गया है, तो उसे दूर करने के लिए खेलकूद, संगीत अथवा साथियों के साथ समय बिताने के लिए भेंजे। सख्ती करने से उत्तेजित होकर घातक कदम उठा सकता है।
4. माता-पिता को चाहिए कि बच्चे के ऑनलाइन पढ़ने की बात पर आंख मूदकर भरोसा नहीं करें। लगातार ऑनलाइन पढ़ाई को समय-समय पर जांच करते रहें।
5. यदि अचानक ऑनलाइन गेम खेलने का पता चलता है, तो भरा-बुरा या पिटाई नहीं करें। उसे बीमारी व्यक्ति की तरह देखभाल की जरूरत होती है।
केस-एक
सीपरी बाजार के एक युवक ने ऑनलाइन गेम की लत के चलते अपनी मांग के क्रेडिट कार्ड से एक लाख रुपये निकालकर लगा दिया। जब वह रुपये हार गया तो उसने घर से रुपये चोरी और वह भी हार गया। मां के जेवर चुराकर बेच डाले और फिर हार गया। इसके बाद उसने कमरा बंद करके हाथों की नसें काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। गनीमत रही कि कुछ समय बाद मां कमरे में पहुंच गई। उसका इलाज कराने के बाद मां जिला अस्पताल लेकर आई, जहां भर्ती करके उपचार किया। काउंसलिंग करने पर रुपये हारने का पता चला।
केस-दो
मऊरानीपुर का करीब 35 वर्ष प्रौढ़ व्यापार करता है। वह ऑनलाइन गेम में दो करोड़ रुपये हार गया। गेम में ज्यादा समय गंवाने की वजह से व्यापार भी पटरी से उतरने लगा। उसने अपनी पत्नी और बेटे की हत्या का प्लान करके स्वयं आत्महत्या का प्रयास किया। किसी तरह से परिजन ने उसे काबू किया और उसे अस्पताल लेकर आए। उसकी हालत देख चार-पांच दिन तक अस्पताल में भर्ती किया गया। जब उसकी काउंसलिंग की तब गेम में दो करोड़ रुपये हारने की वजह से आत्मघाती कदम उठाने की बात स्वीकार कर ली।