झांसी। कोरोना काल में ट्रेनें बंद होने से रेलवे को भी तगड़ा घाटा झेलना पड़ा। रेलवे ने एक साल में करीब चार सौ पचास करोड़ का घाटा हुआ। यात्री ट्रेनों का संचालन बंद रहने और अनारक्षित टिकटों की बिक्री नहीं होने से रेलवे को चपत लगी।
कोरोना काल में 22 मार्च से ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया था। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने धीरे-धीरे ट्रेनों का संचालन शुरू किया। इसके बाद भी अब तक सभी ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। कोरोना काल से पहले झांसी रेल मंडल से करीब 150 ट्रेनें गुजरती थीं। इनमें अनारक्षित श्रेणी में भी टिकट की उपलब्धता के चलते बड़ी संख्या में यात्री सफर करते थे। लेकिन, कोरोना के चलते अब तक ट्रेनों में अनारक्षित श्रेणी में सफर की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। सवारी गाड़ियों के जरिए झांसी रेल मंडल को पिछले साल अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 तक 575 करोड़ रुपये की आय हुई थी। जबकि इस बार अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 तक आय घटकर 143.50 करोड़ रुपये पर आ गई है। अकेले जनवरी महीने में पिछले साल रेलवे को यात्रियों से 55 करोड़ की आय हुई थी। जो इस बार घटकर 33.95 करोड़ पर रह गई। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक सवारी गाड़ियों में मौजूदा समय में केवल आरक्षित श्रेणी में यात्रा की सुविधा है। इसके भी टिकट कम ही बन रहे हैं।
गतिमान एक्सप्रेस नहीं आ सकी पटरी पर
दिल्ली से झांसी के बीच चलने वाली गतिमान एक्सप्रेस एक साल बाद बीतने के पटरी पर नहीं लौट सकी। यह ट्रेनें दिल्ली से झांसी के बीच प्रमुख ट्रेन मानी जाती है। इस ट्रेन में सबसे ज्यादा सैलानी यात्रा करते हैं। आगरा, ग्वालियर व झांसी के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में इस ट्रेन का संचालन न होने से सैलानियों को अब तक फायदा नहीं मिल सका।